Vasai Virar Stray Dog Attacks: वसई-विरार शहर में आवारा कुत्तों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि अब सड़कों और फुटपाथों पर निकलना भी निवासियों के लिए खौफनाक साबित हो रहा है। शहर के मुख्य बाजारों, सोसायटियों के बाहर और गलियों में कुत्तों का झुंड राहगीरों पर हमला कर रहा है।
मनपा के स्वास्थ्य विभाग से मिले हालिया आंकड़ों ने नागरिकों की चिंता और बढ़ा दी है। बीते जनवरी और फरवरी, केवल दो महीनों के भीतर शहर में कुत्ते के काटने के 10,120 मामले दर्ज किए गए हैं। यानी औसतन हर दिन 166 लोग आवारा कुत्तों का शिकार बन रहे हैं। दुकानों और फुटपाथों के आसपास फैले कचरे व मांसाहारी खाद्य अवशेषों की वजह से शहर के लगभग हर कोने में कुत्तों का जमावड़ा लग रहा है।
सड़कों पर अचानक कुत्तों के दौड़ने से दोपहिया वाहन चालक दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। सुबह-शाम टहलने वाले बुजुर्गों और स्कूल जाने वाले बच्च्चों की सुरक्षा पर सीधा खतरा मंडरा रहा है। स्थानीय नागरिक अब बेंगलुरु और कर्नाटक की तर्ज पर वैज्ञानिक वैज्ञानिक एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) अभियान, बड़े पैमाने पर नसबंदी
और एंटी-रेबीज टीकाकरण की मांग कर रहे हैं। नर और मादा दोनों धान की समयबद्ध नसबंदी और नियमित एंटी-रेबीज डोज, खुले में फेंके जाने वाले कचरे की तुरंत सफाई और फीडिंग जोन तय करना, कुत्तों को केवल एक जगह से हटाकर दूसरी जगह छोड़ने की बजाय उनके लिए उचित आश्रय स्थल की व्यवस्था।
पिछले रविवार को भाजपा द्वारार श्वान संकट को लेकर मनपा पर जोरदार आंदोलन किया गया था, लेकिन क्या वसई-विरार में कुत्ते कम हुए? मनपा इस गंभीर मुद्दे को लेकर बिल्कुल गंभीर नहीं है और सिर्फ कागजी घोड़े दौड़ाने में मस्त हैं।
- स्थानीय नागरिक, पिंटू सिंह रघुवंशी
सह आयुक्त वसई-विरार मनपा, जितेंद्र नाईक ने कहा मनपा द्वारा कुत्तों की नसबंदी का काम शुरू कर दिया गया है और शहर के विभिन्न हिस्सों से आवारा कुतों को पकड़े जाने की प्रक्रिया जारी है। वसई-विरार के नागरिकों को आवारा कुत्तों की वजह से किसी भी तरह की परेशानी नहीं आने दी जाएगी।