वसई-विरार महानगरपालिका (सोर्स: सोशल मीडिया) 
पालघर

Vasai-Virar: बविआ-महाविकास आघाड़ी की बातचीत अहम मोड़ पर, फैसला अधर में

Maharashtra Nikay Chunav: वसई-विरार मनपा चुनाव में बविआ, महाविकास आघाड़ी और मनसे के बीच गठबंधन की संभावना मजबूत है, लेकिन सीट बंटवारे और चुनाव निशान को लेकर बातचीत अटकी हुई है।

अपूर्वा नायक

Maharashtra Local Body Election: आगामी वसई-विरार शहर मनपा चुनाव के लिए बहुजन विकास आघाड़ी और महाविकास आघाड़ी के साथ-साथ मनसे के बीच गठबंधन की संभावना लगभग पक्की मानी जा रही है।

लेकिन असल में सीट बंटवारे और चुनाव निशान को लेकर कन्फ्यूजन के कारण यह गठबंधन अभी दोनों गठबंधनों के बीच बातचीत के अहम मोड़ पर अटका हुआ है। निकाय चुनावों की घोषणा के बाद वसई-विरार में पहले से हितेंद्र ठाकुर की बहुजन विकास आघाड़ी को सत्ता से दूर रखने के लिए शिवसेना, भाजपा और दूसरी सहयोगी पार्टियों ने मिलकर एक बड़ा गठबंधन बनाया है।

वहीं दूसरी ओर, शिवसेना (ठाकरे गुट), कांग्रेस और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के मुख्य नेताओं ने ठाकुर से मुलाकात की थी और हितेंद्र ठाकुर की बहुजन विकास आघाड़ी के साथ गठबंधन बनाने के लिए बातचीत शुरू कर दी थी।

राजनीति के जानकारों का अनुमान है कि अगर आने वाले मनपा चुनाव में महाविकास आघाड़ी और बहुजन विकास आघाड़ी का गठबंधन होता है, तो भाजपा को सबसे ज्यादा नुकसान हो सकता है। लेकिन, सीट शेयरिंग का झगड़ा और सिंबल पर उलझन सुलझने के बाद भी, गठबंधन को लेकर रुख अभी भी कुछ साफ नहीं है।

हालांकि बीजेपी और शिंदे गुट के बीच आम सहमति है और ये दोनों पार्टियां आने वाले मनपा चुनाव में एक बड़े गठबंधन के जरिए मैदान में उतरने वाली हैं। इसलिए वसई-विरार का पूरा राजनीतिक ध्यान इस बात पर लगा हुआ है कि महाविकास आघाड़ी और बहुजन विकास आघाड़ी के बीच संभावित गठबंधन होगा उम्मीदवारों की भीड़ बढ़ने लगी है।

वसई विरार मनपा चुनाव 115 सीटों के लिए होने वाला हैं। ठाकरे गुट ने दावा किया है कि 29 वार्ड पैनल के हिसाब से हमें 29 सीटें मिलनी चाहिए। वही कांग्रेस भी सम्मानजनक सीटें मांग रही है।

सिटी पर अड़ी है बविआ

चर्चा है कि शिवसेना (ठाकरे गुट), कांग्रेस और बहुजन विकास आघाड़ी पार्टी मिलकर वसई विरार मनपा का चुनाव लड़ेंगे। दूसरी ओर, तीनों पार्टियों के बीच चुनाव निशान पर कोई सहमति नहीं बन पा रही है। बविआ जहां सीटी के निशान पर चुनाव लड़ने पर अड़ी है, वहीं कांग्रेस भी हाथ के पंजें के निशान को प्राथमिकता देने की माग कर रही है। दूसरी ओर अगर इनमें से किसी भी निशान पर चुनाव लड़ा जाता है, तो लोग गलतफहमी में रहेंगे कि शिवसेना (ठाकरे गुट। क्या किसी दूसरी पार्टी में मर्ज हो गया है, इसीलिए शिवसेना भी इसका विरोध कर रही है। इसलिए सीट शेयरिंग के मुद्दे के बाद, चुनाव निशान के मुद्दे पर गठबंधन में शामिल पार्टियों के बीच विवाद की तस्वीर बन गई है। वहीं बविआ और महाविकास आघाड़ी के बीच गठबंधन के संकेत मिलने के बाद उम्मीदवारों की भीड़ बढ़ने लगी है।

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