ट्रस्टी पुरुषोत्तम कडलक (सोर्स: सोशल मीडिया) 
नासिक

VIP Darshan Scam SIT: ट्रस्टी कडलक के बैंक खातों की जांच शुरू, 84% कमीशन का सच आएगा सामने

VIP Darshan Scam: एसआईटी ने संदिग्ध ट्रस्टी पुरुषोत्तम कडलक और उसके सहयोगियों के बैंक स्टेटमेंट खंगालना शुरू कर दिया है। करोड़ों के इस काले बाजार की परतें अब खुलने लगी हैं।

गोरक्ष पोफली

Nashik Police Investigation: प्रसिद्ध श्री त्र्यंबकेश्वर मंदिर में हुए बहुचर्चित वीआईपी दर्शन घोटाले की जांच ने अब नया मोड़ ले लिया है। विशेष जांच दल (SIT) ने इस घोटाले की तह तक जाने के लिए गिरफ्तार संदिग्ध ट्रस्टी पुरुषोत्तम कडलक और उसके भतीजों के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस को संदेह है कि वीआईपी दर्शन के नाम पर वसूले गए अवैध धन का एक बड़ा हिस्सा बैंक खातों और विभिन्न डिजिटल माध्यमों से इधर-उधर किया गया है। इसी के चलते एसआईटी प्रमुख और त्र्यंबकेश्वर के पुलिस निरीक्षक महेश कुलकर्णी के नेतृत्व में जांच टीम ने विभिन्न बैंकों का रुख किया है।

84 प्रतिशत कमीशन का काला बाजार और डिजिटल फुटप्रिंट्स

जांच का सबसे चौंकाने वाला पहलू 84 प्रतिशत कमीशन का वह खेल है, जो दर्शन के नाम पर वसूला जा रहा था। एसआईटी अब इस बात का तकनीकी साक्ष्य जुटा रही है कि यह कमीशन केवल नकद रूप में लिया गया या इसमें ऑनलाइन भुगतान और बैंक हस्तांतरण का भी उपयोग हुआ। बैंक रिकॉर्ड से यह स्पष्ट हो पाएगा कि मंदिर की गरिमा को ताक पर रखकर कमाया गया यह काला धन किन-किन खातों में भेजा गया। पुलिस को अंदेशा है कि कडलक परिवार ने इस अवैध आय को छिपाने के लिए कई बेनामी खातों का इस्तेमाल किया होगा। इस वित्तीय ट्रेल की जांच से घोटाले की वास्तविक राशि का अनुमान लगाया जा सकेगा, जो करोड़ों में होने की आशंका है।

संपत्तियों और संदिग्ध आर्थिक निवेशों की घेराबंदी

वित्तीय लेन-देन के अलावा, एसआईटी पुरुषोत्तम कडलक और उसके करीबियों की चल-अचल संपत्तियों की भी गहनता से जांच कर रही है। पुलिस टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पिछले कुछ वर्षों में आरोपियों की संपत्ति में अचानक जो उछाल आया है, उसका स्रोत क्या है। क्या इस अवैध आय को रियल एस्टेट या अन्य संदिग्ध निवेशों में लगाया गया है? जांच टीम वर्तमान में चार प्रमुख सवालों पर केंद्रित है: बिना रसीद के श्रद्धालुओं को किस गुप्त द्वार से प्रवेश दिया जाता था, इसमें किन सुरक्षाकर्मियों की मिलीभगत थी, यह गोरखधंधा कितने वर्षों से चल रहा था, और हर महीने होने वाली करोड़ों की इस काली कमाई का अंतिम गंतव्य क्या था?

घोटाले में अन्य कर्मचारियों और विभागीय संलिप्तता की आशंका

एसआईटी को संदेह है कि इतना बड़ा घोटाला अकेले कडलक परिवार के दम पर संभव नहीं था। जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मंदिर प्रशासन और सुरक्षा विभाग के अन्य कर्मचारियों की भूमिका का पता लगाना है। क्या मंदिर के भीतर सक्रिय इस गिरोह को उच्च स्तर पर किसी का संरक्षण प्राप्त था? पुलिस उन सभी लोगों की सूची तैयार कर रही है जो कडलक के सीधे संपर्क में थे या जो वीआईपी प्रवेश द्वारों पर तैनात रहते थे।

जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, त्र्यंबकेश्वर मंदिर परिसर में बेधड़क सक्रिय रहे इस गिरोह के कई और सहयोगियों के चेहरे बेनकाब होने की संभावना है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि मंदिर की पवित्रता और श्रद्धालुओं के भरोसे से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

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