पुरुषोत्तम कडलक (सोर्स: डिजाइन फोटो) 
नासिक

त्र्यंबकेश्वर मंदिर दर्शन घोटाला, ट्रस्टी पुरुषोत्तम कडलक पर शिकंजा, बैंक खाते में मिले 1.13 करोड़

VIP Darshan Fraud: त्र्यंबकेश्वर मंदिर दर्शन घोटाले में मुख्य आरोपी ट्रस्टी पुरुषोत्तम कडलक के बैंक खाते में 1.13 करोड़ रुपये मिले। प्रशासन ने ट्रस्टी पद रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की।

गोरक्ष पोफली

Trimbakeshwar Temple Scam: आस्था के केंद्र और देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक सुप्रसिद्ध त्र्यंबकेश्वर मंदिर की पवित्रता को अपनी व्यक्तिगत कमाई का जरिया बनाने वाले रैकेट का पर्दाफाश होने के बाद प्रशासन ने अब निर्णायक कार्रवाई शुरू कर दी है। इस पूरे घोटाले के मुख्य सूत्रधार और मंदिर के ट्रस्टी पुरुषोत्तम कडलक की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा घटनाक्रम में, धर्मार्थ उपायुक्त कार्यालय ने कडलक का ट्रस्टी पद रद्द करने की वैधानिक प्रक्रिया शुरू कर दी है।

वीआईपी दर्शन का ब्लैक मार्केटिंग नेटवर्क

पुलिस जांच और एसआईटी (SIT) की पड़ताल में यह कड़वा सच सामने आया है कि पुरुषोत्तम कडलक अपने दो भतीजों की मदद से मंदिर के भीतर 'वीआईपी दर्शन' का एक संगठित काला कारोबार चला रहे थे। जांच के अनुसार, दूर-दराज से आने वाले भोले-भाले श्रद्धालुओं को बिना कतार के मात्र 10 मिनट में दर्शन कराने का झांसा दिया जाता था। इसके लिए एक बकायदा 'रेट कार्ड' निर्धारित था, जिसमें प्रति व्यक्ति 2,000 से 3,000 रुपये वसूले जाते थे। त्योहारों और विशेष अवसरों पर, जब भीड़ चरम पर होती थी, तो यह दर 10,000 से 12,000 रुपये तक पहुंच जाती थी। कडलक के भतीजे एजेंटों के माध्यम से पैसे लेते थे और सीधे फोन कॉल पर वीआईपी प्रवेश सुनिश्चित करवाते थे।

बैंक खातों में मिली करोड़ों की संदिग्ध राशि

पिछले 20 दिनों से जेल की सलाखों के पीछे बंद पुरुषोत्तम कडलक के वित्तीय लेन-देन की जब गहनता से जांच की गई, तो अधिकारी दंग रह गए। उनके बैंक खातों में 1 करोड़ 13 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि जमा मिली है। हालांकि, कडलक ने बचाव में दावा किया है कि यह पैसा उनके होटल व्यवसाय, लेबर कॉन्ट्रैक्ट और पैतृक संपत्ति से आया है, लेकिन एसआईटी को संदेह है कि इसमें से कम से कम 50 लाख रुपये श्रद्धालुओं से की गई अवैध वसूली का हिस्सा हैं। पुलिस फिलहाल इस पूरे 'मनी ट्रेल' की बारीकी से जांच कर रही है ताकि भ्रष्टाचार की जड़ों तक पहुंचा जा सके।

प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल

चूंकि कडलक की नियुक्ति धर्मार्थ उपायुक्त कार्यालय द्वारा की गई थी, इसलिए उन्हें पद से हटाने का अधिकार भी इसी विभाग के पास है। सूत्रों का कहना है कि देवस्थान की धूमिल होती छवि को बचाने के लिए धर्मार्थ आयुक्त 'सुओ-मोटो' (स्वतः संज्ञान) के तहत कड़ी कार्रवाई कर सकते हैं।

राजनीतिक रूप से भी यह मामला गरमा गया है क्योंकि कडलक शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के पदाधिकारी भी हैं। विपक्ष और स्थानीय नागरिकों में इस बात को लेकर भारी रोष है। एसआईटी अब तक इस मामले में कडलक और उनके भतीजों सहित 7 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि दो अन्य संदिग्ध अभी भी फरार हैं। जिला न्यायालय और पुलिस प्रशासन जल्द ही इस संबंध में अपनी विस्तृत और गोपनीय रिपोर्ट धर्मार्थ आयुक्तालय को सौंपने वाला है, जिसके बाद कडलक की आधिकारिक विदाई तय मानी जा रही है।

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