Nashik Municipal Corporation Dwarka Chowk: सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियों, गैस पाइपलाइन और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत चल रहे विकास कार्यों ने नासिक की ट्रैफिक व्यवस्था को पंगु बना दिया है। शहर के 43 में से 23 से अधिक प्रमुख चौराहों पर बेतरतीब खुदाई के कारण सड़कों की चौड़ाई सिमट गई है, जिससे यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। स्थिति इतनी गंभीर है कि सिग्नल हरा होने के बाद भी वाहन आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।
सिग्नलों का संकट नासिक शहर के 43 में से 5 सिग्नल पूरी तरह बंद हैं, जबकि अन्य सिग्नलों के पास सड़कों की खस्ताहाल स्थिति ने यातायात को धीमा कर दिया है। खुदाई के कारण सड़कों पर 'स्टॉप लाइन' का नामोनिशान मिट चुका है। अनजाने में लाइन क्रॉस करने वाले वाहन चालकों को ऑटोमैटिक कैमरों के जरिए सीधे ई-चालान मिल रहे हैं, जिससे नागरिकों में भारी रोष है।
मुंबई नाका, द्वारका, वडाला नाका, कॅनडा कॉर्नर, नाबार्ड चौक, त्र्यंबक नाका और पुराना गंगापूर नाका जैसे अति व्यस्त इलाकों में वाहनों की लंबी कतारें आम हो गई हैं। सड़क खोदने वाली एजेंसियों, महानगरपालिका और ट्रैफिक पुलिस के बीच तालमेल की कमी साफ झलकती है। एक ओर खुदाई से ट्रैफिक रुकता है, तो दूसरी ओर चालान काटने वाली मशीनें सक्रिय रहती हैं।
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नागरिकों और वाहन चालकों का तर्क है कि जब तक खुदाई का काम चल रहा है, तब तक इन चौराहों पर 'ई-चालान' की प्रक्रिया को अस्थाई रूप से स्थगित किया जाए। साथ ही, चौराहों पर अस्थाई स्टॉप लाइन पेंट की जाए और वैकल्पिक यातायात व्यवस्था का तुरंत प्रबंध किया जाए ताकि ट्रैफिक का दबाव कम हो सके।
खुदाई के कारण चौराहों की चौड़ाई बहुत कम हो गई है। सिग्नल हरा होने के बाद भी गाड़ियां आगे नहीं बढ़ पाती, जिससे जाम लगा रहता है, लेकिन इस जाम का ठीकरा अक्सर वाहन चालकों के सिर फोड़ दिया जाता है।
- प्रशांत शिंदे, दुकानदार