नासिक जिले के 654 स्थानों पर गहराया भीषण जलसंकट, 179 निजी टैंकरों के भरोसे 3 लाख से अधिक आबादी की प्यास

Nashik Water Crisis: नासिक जिले के 654 गांवों-वाड़ियों में भीषण जलसंकट पैदा हो गया है। मानसून की देरी के बीच 179 निजी टैंकरों के जरिए 3.18 लाख से अधिक नागरिकों तक पानी पहुंचाया जा रहा है।
Nashik district faces a severe water crisis across 654 locations due to delayed monsoon. Over 3.18 lakh residents are now dependent on 179 private water tankers.
भीषण जलसंकट (फोटो सोर्स- AI)
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Heatwave Impact Maharashtra: मानसून की प्रतीक्षा कर रहे नासिक जिले में जलसंकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। जिले के 174 गांवों और 480 वाड़ियों सहित कुल 654 स्थानों पर पीने के पानी की भारी किल्लत पैदा हो गई है। हालात ऐसे हैं कि 3 लाख 18 हजार से अधिक नागरिकों की दैनिक जलापूर्ति पूरी तरह टैंकरों के भरोसे चल रही है।

जिला प्रशासन के ताजा आंकड़ों के अनुसार, प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल उपलब्ध कराने के लिए बड़े पैमाने पर टैंकरों की व्यवस्था की गई है। खास बात यह है कि वर्तमान में सरकारी स्तर पर एक भी टैंकर संचालित नहीं हो रहा, जबकि पूरी जलापूर्ति व्यवस्था 179 निजी टैंकरों के माध्यम से संभाली जा रही है। ये टैंकर प्रतिदिन 395 फेरे लगाकर गांवों और वाड़ियों तक पानी पहुंचा रहे हैं।

अधिकारियों के मुताबिक, इस वर्ष भीषण गर्मी और लंबे समय तक बारिश नहीं होने के कारण जिले में भूजल स्तर तेजी से नीचे चला गया है। इसके चलते अनेक कुएं, हैंडपंप और अन्य पारंपरिक जलस्रोत सूख गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति सबसे अधिक गंभीर बनी हुई है, जहां स्थानीय जलस्रोतों के समाप्त होने से लोगों को पीने के पानी के लिए टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

नासिक जलसंकट से प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन लगातार निगरानी रख रहा है। अधिकारियों का कहना है कि मानसून के आगमन तक जलापूर्ति बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है। यदि बारिश में और देरी होती है तो प्रभावित गांवों की संख्या बढ़ने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

नासिक जिला प्रशासन ने बताया कि पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए निजी टैंकरों की संख्या और उनके फेरों की नियमित समीक्षा की जा रही है। साथ ही जलस्रोतों की स्थिति पर भी नजर रखी जा रही है, ताकि जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त उपाय किए जा सकें।

फिलहाल, नासिक जिले के लाखों नागरिक मानसून की पहली बारिश का इंतजार कर रहे हैं। प्रशासन को उम्मीद है कि जल्द ही अच्छी वर्षा होने से जलाशयों और भूजल स्रोतों का स्तर सुधरेगा तथा जिले को इस गंभीर पेयजल संकट से राहत मिलेगी। तब तक प्रभावित क्षेत्रों में टैंकरों के माध्यम से जलापूर्ति जारी रखी जाएगी।

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