Nashik Teachers Medical Reimbursement: नासिक शिक्षकों को जिला परिषद के माध्यम से मिलने वाली मेडिकल बिलों की प्रतिपूर्ति व्यवस्था अब हमेशा के लिए बंद होने जा रही है। इसके बजाय, जिला परिषद सहित 100 प्रतिशत सहायता प्राप्त निजी स्कूलों के शिक्षकों को प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत कैशले सचिकित्सा सुविधा प्रदान की जाएगी।
शिक्षण विभाग ने इस योजना का लाभ उठाने के लिए आभा कार्ड (आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट) बनवाने के निर्देश दिए हैं। अब तक शिक्षक किसी भी अस्पताल में इलाज कराने के लिए स्वतंत्र थे। इसके बाद उन्हें मूल बिल, डिस्चार्ज कार्ड और दवाओं की रसीदें शिक्षण विभाग के वेतन दल के पास भौतिक रूप से जमा
करनी पड़ती थीं।
जांच और सत्यापन के बाद सालभर में ये बिल मंजूर होते थे। इस प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर कमीशन का खेल चलता था और कई तरह की अनियमितताएं भी सामने आती थीं। अब चूंकि मरीज का पूरा इतिहास डिजिटल होगा, इसलिए फर्जी बिल जमा करने के मामलों पर पूरी तरह रोक लग जाएगी।
शिक्षण निदेशालय द्वारा जारी परिपत्र में स्पष्ट किया गया है कि भविष्य में किसी भी प्रकार के 5 लाख रुपये तक के मेडिकल रिइंबर्समेंट के दावे स्वीकार नहीं किए जाएंगे। सभी जिला परिषद और 100 प्रतिशत अनुदानित निजी स्कूलों के सभी शिक्षक एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए आभा कार्ड बनवाना अनिवार्य कर दिया गया है।
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इस योजना के तहत सूचीबद्ध (इम्पैनल्ड) अस्पतालों में इलाज के लिए भर्ती होने पर अब शिक्षकों को अपनी जेब से पैसे नहीं देने होंगे। प्रत्येक शिक्षक और गैर-शिक्षण कर्मचारी के परिवार को प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का मुफ्त स्वास्थ्य सुरक्षा कवच (हेल्थ कवर) मिलेगा। डिजिटल प्रणाली लागू होने से जहां एक और शिक्षकों की दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति मिलेगी, वहीं दूसरी ओर कागजी कार्रवाई में होने वकाले भ्रष्टाचार पर भी लगाम लगेगी।