Nashik water conservation Mann Ki Baat: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को प्रसारित अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात में नासिक जिले में चल रहे जल संरक्षण अभियान की विशेष सराहना की। उन्होंने जिले में कैच द रेन अभियान के तहत किए जा रहे जल संवर्धन कार्यों का उल्लेख करते हुए इसे देश के लिए प्रेरणादायी पहल बताया।
जिलाधिकारी आयुष प्रसाद के मार्गदर्शन में नासिक जिले में कैच द रेन अभियान प्रभावी ढंग से चलाया जा रहा है। जनभागीदारी, विभिन्न शासकीय विभागों के समन्वय तथा अनेक योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के माध्यम से जिले में जल सुरक्षा को मजबूत बनाया जा रहा है।
इसके अंतर्गत जलयुक्त शिवार अभियान 2.0, गादमुक्त बांध-गादयुक्त शिवार योजना, नालों का गहरीकरण एवं चौड़ीकरण, कृत्रिम भूजल पुनर्भरण कुएं (रिचार्ज शाफ्ट), वर्षा जल संचयन, सूक्ष्म सिंचाई, जल बजटिंग, जल दक्ष कृषि तथा जलतारा जैसे अनेक उपक्रम सफलतापूर्वक लागू किए जा रहे हैं। इन प्रयासों से जिले में बड़े पैमाने पर जल संग्रहण क्षमता विकसित हुई है।
वनाधिकार कानून के अंतर्गत लाभार्थियों को वितरित भूमि पर मृदा एवं जल संरक्षण कार्य कर उसे अधिक उत्पादक और टिकाऊ बनाने का विशेष अभियान भी जिला प्रशासन चला रहा है। इसके साथ ही भूजल पुनर्भरण, पारंपरिक जलस्रोतों के पुनर्जीवन तथा वर्षा जल संचयन के माध्यम से जल उपलब्धता बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
नासिक के इन नवाचारों की सराहना करते हुए भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के नेशनल वॉटर मिशन द्वारा आयोजित 55वीं वॉटर सीरीज वेबिनार में जिलाधिकारी आयुष प्रसाद को विशेष वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया था। उन्होंने बेस्ट प्रैक्टिसेज ऑफ वॉटर मैनेजमेंट विषय पर नासिक जिले में लागू जल संरक्षण मॉडल की जानकारी राष्ट्रीय स्तर पर साझा की थी।
'मन की बात' में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले कार्यक्रम में उन्होंने कैच द रेन अभियान को जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया था। इस अभियान का संदेश है कि जहां बारिश हो, जब बारिश हो, वहीं पानी को संजोया जाए। उन्होंने बताया कि 4 जुलाई से देशभर में विशेष अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, पुराने जलखेतों का पुनर्जीवन और वृक्षारोपण को नई गति मिली है।
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देशभर के सफल उदाहरणों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से कहा कि महाराष्ट्र के नासिक में बड़े पैमाने पर जल संग्रहाण क्षमता विकसित की गई है। उन्होंने कहा कि गांवों, शहरों, ग्राम पंचायतों और सामाजिक संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी से जल संरक्षण अब जन आंदोलन का रूप ले चुका है।