

Sambhajinagar Demolition Delay: छत्रपति संभाजीनगर शहर की जर्जर व खतरनाक इमारतों के खिलाफ मनपा की कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित नजर आ रही है। सच्चाई यह है कि मानसून का आधा समय बीत जाने के बावजूद शहर की करीब 80 खतरनाक इमारतों के मालिकों को सिर्फ नोटिस जारी करने में धन्यता मानी गई है, मगर अब तक एक भी इमारत नहीं गिराई गई है। ऐसे में लगातार हो रही वर्षा के बीच संभावित हादसों का खतरा बढ़ गया है। इसे देखते हुए नागरिकों ने तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
मनपा के सर्वेक्षण में शहर की कई इमारतों को खतरनाक घोषित किया गया जिनमें सबसे अधिक इमारतें पुराने शहर के घनी आबादी वाले व व्यावसायिक क्षेत्रों में स्थित हैं। इन क्षेत्रों से रोजाना हजारों लोगों का आवागमन होने से किसी भी समय बड़े हादसे की प्रबल आशंका है।
नागरिकों की जान माल की सुरक्षा के लिए मानसून शुरू होने से पहले इन इमारतों को खाली कराकर तोडू कार्रवाई की जानी थी। हालांकि, प्रशासन ने सिर्फ नोटिस जारी करने तक ही कार्रवाई सीमित रखी। ऐसे में यदि कोई इमारत के गिरने से जनहानि होती है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा, यह सवाल बना हुआ है।
छत्रपति संभाजीनगर मनपा की सूची में शामिल अधिकांश खतरनाक इमारतें पुराने शहर के व्यावसायिक व घनी आबादी वाले क्षेत्रों में स्थित है। इनमें सराफा बाजार, मुलूमची बाजार, शाहगंज, चौराहा, तिलकपथ, गुलमंडी, नाज गली, नगरखाना गली, केले बाजार, खाराकुआं, दलालवाड़ी, बर्तन बाजार, सुपारी हनुमान रोड व बाख्दगर नाला क्षेत्र प्रमुख है। इन क्षेत्रों में दिनभर भारी भीड रहने से खतरा और बढ़ गया है। मनपा प्रशासन का कहना है कि सभी जोन अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए जा चुके हैं।
शहर की खतरनाक 6 इमारती पर कारवाई करने सभी जोन अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं। यदि कोई अधिकारी कार्रवाई में लापरवाही करता है, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
- मनपा अतिक्रमण विभाग, नियंत्रण अधिकारी, संतोष वाहुले