सब्जियों के दाम गिरने से किसान परेशान (सौजन्यः सोशल मीडिया) 
नासिक

सब्जियों के दाम गिरने से किसान परेशान,मराठा आरक्षण आंदोलन व भारी बारिश ने किसानों को रुलाया

Nashiks Farmers: नाशिक शहर और उसके आसपास पिछले कुछ दिनों से हो रही भारी बारिश और मुंबई में चले मराठा आरक्षण आंदोलन ने किसानों की जेब पर पानी फेर दिया है

आंचल लोखंडे

Falling Prices Of Vegetables: नासिक शहर और उसके आसपास पिछले कुछ दिनों से हो रही भारी बारिश और मुंबई में चले मराठा आरक्षण आंदोलन ने किसानों की जेब पर पानी फेर दिया है। मुंबई में आंदोलन के कारण सब्जिया समय पर उन तक नहीं पहुँच पा रही हैं, इसलिए स्थानीय बाज़ार समिति में पत्तेदार सर्बज़यों की भारी कमी हो गई है।

बारिश जारी रहने के कारण, बाज़ार में माल ज्यादा देर तक नहीं टिकता। इस वजह से पत्तेदार सब्जिर्यों के दामों में अचानक आई गिरावट ने उत्पादकों को भारी परेशानी में डाल दिया है। किसानों का कहना है कि धनिया 1 रुपये, मेथी 20 रुपये रुपये किलो बिक रही है। इसलिए, कई उत्पादकों को अपना माल फेंकने की नौबत आ गयी हैं।

बाजार से अच्छी सब्जियां गायब

सब्जी उत्पादकों का कहना है कि मांग के बावजूद, आपूर्ति में अनिश्चितता के कारण व्या कीमतें कम कर दी हैं, जिसका सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है। इस बारिश ने मेथी, धनिया, पालक और पालक जैसी पत्तेदार सब्जियों की फसलों को काफी नुकसान पहुंचाया है कुछ जगहों पर, जो सब्जियां काटी गई थीं, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है। इस वजह से बाजार में अच्छी गुणवत्ता वाली सब्जियां कम मात्रा में आ रही हैं।

सरकार करे भरपाई

किसानों का कहना है इस साल मानसून के समय हुई भारी बरसात की वजह से किसानों को भारी नुकसान हुआ है, किसानों को लागत तक नहीं मिल पा रही है सरकार को इसकी तरफ ध्यान देने की जरुरत है।किसानों का कहना है कि किसानों का हो रहे इस नुकसान की भरपाई सरकार को करनी चाहिए ताकि किसान अपने परिवार का भरण पोषण कर सके। किसानों का कहना है कि सरकार को कोई ऐसी नीति बनानी चाहिए ताकि किसानों को नुकसान के बाद परेशानी न हो।

बारिश का कहर, खेत डूबे, घर ढहे

मुआवजे की मांग अमलनेर तालुका क्षेत्र में पिछले कई दिनों से जारी मूसलधार बारिश ने जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। 23 और 24 अगस्त से लगातार हो रही बारिश के कारण खेत, घर और गांवों की सड़कों का भारी नुकसान हुआ है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए अमलनेर तालुका कांग्रेस कमेटी ने तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर तत्काल पंचनामे कर मुआवजे की मांग की है। इस अतिवृष्टि का सबसे बड़ा झटका किसानों को लगा है। खेतों में खड़ी मूंग, उड़द और कपास जैसी फसलें पानी में डूब गईं, जिससे कई जगह खेत पूरी तरह बर्बाद हो गए हैं। कृषि विभाग का अनुमान है कि उत्पादन में 80 फीसदी तक की गिरावट संभव है, जिसने किसानों पर गहरा आर्थिक संकट ला दिया है। सिर्फ फसल ही नहीं, बल्कि गांवों के कच्चे-पक्के रास्ते भी ध्वस्त हो गए हैं और कई कच्चे और पक्के मकान ढह गए हैं, जिससे परिवार बेघर हो गए हैं।

कांग्रेस ने सौंपा ज्ञापनः

कांग्रेस कमेटी ने शासन से तुरंत नुकसान का सर्वे कर सहायता घोषित करने की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया है कि "अमलनेर की जनता बड़े संकट से गुजर रही है, सरकार को तत्काल हस्तक्षेप करना होगा।"

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