Maharashtra Politics Vidhan Parishad Election: नासिक स्थानीय प्राधिकरण निर्वाचन क्षेत्र के विधान परिषद चुनाव के लिए नामांकन वापसी के आखिरी दिन कलेक्ट्रेट कार्यालय में जबरदस्त सियासी उठापटक देखने को मिली। महायुति के अधिकृत उम्मीदवार नरेंद्र दराडे के खिलाफ गिते बंधुओं के बागी रुख ने चुनाव को बेहद रोमांचक बना दिया है। आखिरी समय में गणेश गिते के नामांकन वापस लेने के बावजूद उनके भाई गोकुल गिते ने मैदान में डटे रहने का फैसला किया है, जिससे समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं।
नामांकन वापसी की प्रक्रिया के अंतिम क्षणों तक नेताओं और प्रत्याशियों के बीच तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। गणेश गिते ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के प्रति निष्ठा जताते हुए अपना नामांकन वापस ले लिया, लेकिन उनके भाई गोकुल गिते ने किसी भी दबाव को मानने से इनकार कर दिया। गोकुल गिते ने शिवसेना उम्मीदवार नरेंद्र दराडे के पुत्र पर गंभीर आरोप लगाते हुए धमकी देने की बात कही, जिसके बाद उनका रुख और भी आक्रामक हो गया। अब मैदान में नरेंद्र दराडे (शिवसेना), गोकुल गिते और प्रसाद हिरे (निर्दलीय) के रहने से यह चुनाव सीधा मुकाबला न रहकर त्रिकोणीय हो गया है।
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि गोकुल गिते को विपक्षी दलों का मौन समर्थन प्राप्त हो सकता है, जिससे महायुति की प्रतिष्ठा दांव पर लग गई है। अब सभी की निगाहें मंत्री गिरीश महाजन की अगली चाल पर टिकी है। क्या महायुति एकजुट रह पाएगी या 'अपनों की बगावत' इस चुनाव को और भी प्रतिष्ठापूर्ण बना देगी, यह तो चुनाव के परिणाम ही बताएंगे।
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संख्या बल के आधार पर महायुति (432 नगरसेवक) विपक्ष (182 नगरसेवक) के मुकाबले काफी मजबूत स्थिति में है। बावजूद इसके, महायुति के भीतर 'मतों के विभाजन' की आशंका ने वरिष्ठ नेताओं की चिंता बढ़ा दी है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे सहित मंत्री गिरीश महाजन जैसे वरिष्ठ नेताओं ने डैमेज कंट्रोल के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी, लेकिन इसका असर केवल आंशिक रहा।