सांसद भास्कर भगरे करीब 10 किमी का पथरीला और दुर्गम रास्ता पार कर खिरपाडा पहुंचे।
ग्रामीणों के अनुसार, पहली बार कोई सांसद उनके गांव पहुंचा।
सड़क, मोबाइल नेटवर्क, स्वास्थ्य, शिक्षा और पेयजल की सुविधाएं अब भी अधूरी।
महाराष्ट्र और गुजरात को जोड़ने वाली पार नदी पर पुल बनाने की मांग।
14 पाड़ों की समस्याओं की संबंधित विभागों के साथ समीक्षा करने के निर्देश।
Nashik Surgana Village Bhaskar Bhagare Rural Development: नासिक जिले की सुरगाणा तहसील के महाराष्ट्र-गुजरात सीमावर्ती खिरपाडा सहित कई गांव आज भी सड़क, मोबाइल नेटवर्क, स्वास्थ्य और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं से जूझ रहे हैं। सांसद भास्कर भगरे करीब 10 किलोमीटर का दुर्गम घाट मार्ग पार कर गांव पहुंचे और 14 पाड़ों की समस्याओं की संयुक्त समीक्षा के निर्देश दिए।
नासिक शहर, आजादी के कई दशक बीत जाने के बाद भी नासिकजिले की सुरगाणा तहसील के महाराष्ट्र-गुजरात सीमावर्ती गांवों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। कहीं सड़क की उचित व्यवस्था नहीं है, तो कहीं मोबाइल नेटवर्क तक उपलब्ध नहीं है। ऐसे में ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
इसी स्थिति का जायजा लेने सांसद भास्कर भगरे करीब 10 किलोमीटर का दुर्गम और पथरीला घाट मार्ग पार कर खिरपाडा गांव पहुंचे। ग्रामीणों ने उनका स्वागत किया और अपनी समस्याएं सामने रखीं। ग्रामीणों के मुताबिक, पहली बार कोई सांसद उनके गांव तक पहुंचा है।
खिरपाडा, वडपाडा, वांगनपाडा, सागपाडा, कहांडोळपाडा और खोबला सहित क्षेत्र के कई गांवों में बारहमासी सड़क, पुल, मोबाइल नेटवर्क, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, पेयजल और परिवहन जैसी सुविधाओं की कमी बताई गई।
दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण ग्रामीणों को विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने में परेशानी होती है। हाल ही में एक गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए झोली का सहारा लेना पड़ा था। इस घटना ने क्षेत्र में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति पर फिर सवाल खड़े किए हैं।
सांसद भगरे ने खिहीं ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले खिरपाडा सहित कुल 14 पाड़ों की समस्याओं की संयुक्त समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को स्वास्थ्य, शिक्षा, महावितरण, जलजीवन मिशन और अन्य विभागों के साथ समन्वय कर काम करने को कहा।
क्षेत्र की लंबित समस्याओं के समाधान के लिए प्रांताधिकारी, तहसीलदार और आदिवासी विकास विभाग के साथ समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया गया।
सांसद ने महाराष्ट्र और गुजरात को जोड़ने वाली पार नदी पर पुल की आवश्यकता का भी जायजा लिया। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क और पुल बनने से सीमावर्ती गांवों का आवागमन आसान हो सकेगा। उन्होंने खिरपाडा-तवा सड़क, पार नदी पर पुल और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास की मांग की।
सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश इजल ने कहा कि गांव तक पहुंचने के लिए आज भी उचित सड़क नहीं है और मोबाइल नेटवर्क की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अधिकारियों को दिए गए निर्देशों के बाद समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।
ग्रामीणों को अब आशा है कि उनकी लंबे समय से लंबित मांगों पर कार्रवाई होगी और क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं का विकास हो सकेगा।