Maharashtra Education Reform Proposal: नासिक वर्तमान सूचना प्रौद्योगिकी के युग में विद्यार्थियों को डिजिटल रूप से साक्षर बनाने के लिए नासिक के 'जीवन केसरी मराठी विद्यार्थी समूह' ने एक महत्त्वपूर्ण पहल की है।
समूह ने महाराष्ट्र राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल (बालभारती) को ज्ञापन भेजकर भाषा विषयों में व्यावहारिक परीक्षा लागू करने की मांग की है। समूह के सह-प्रमुख अमित पगार के अनुसार, वर्तमान में ई-मेल और ब्लॉग राइटिंग जैसे विषय केवल लिखित परीक्षा तक सीमित हैं, जिससे छात्र इनका वास्तविक उपयोग नहीं सीख पा रहे हैं।
प्रस्ताव में सुझाव दिया गया है कि 20 अंकों के आंतरिक मूल्यांकन के तहत छात्रों से वास्तव में ई-मेल आईडी बनवाना और ई-मेल भेजने जैसी प्रक्रियाएं करानी चाहिए।
जिन ग्रामीण या शहरी कॉलेजों में कंप्यूटर लैब की सुविधा नहीं है, वहां छात्रों को अपने स्मार्टफोन के माध्यम से ब्लॉग पोस्ट तैयार कर उसका स्क्रीनशॉट जमा करने का विकल्प दिया जा सकता है।
डिजिटल कौशल को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण देने और राज्य स्तर पर नियमावली बनाने की मांग की गई है।
प्रस्तावकः जीवन केसरी मराठी विद्यार्थी समूह, नासिक।
लक्ष्यः कक्षा 11वीं और 12वीं के छात्र
विषयः ई-मेल राइटिंग और ब्लॉग राइटिंग।
सुझावः 20 अंकों का प्रैक्टिकल/आंतरिक मूल्यांकन।
साधनः कंप्यूटर लैब या स्मार्टफोन (स्क्रीनशॉट सबमिशन)।
जीवन केसरी समूह का मानना है कि लेखन कौशल का असली उद्देश्य केवल परीक्षा पास करना नहीं, बल्कि व्यावसायिक जीवन में संवाद साधने की क्षमता विकसित करना है।
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यदि छात्र स्कूल स्तर पर ही प्रोफेशनल ईमेल ड्राफ्ट करना सीख जाएंगे, तो उन्हें करियर में बड़ी मदद मिलेगी। ब्लॉग राइटिंग के माध्यम से छात्र अपने विचारों को डिजिटल मंच पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना सीखेंगे।
इस प्रस्ताव की प्रतियां शिक्षा सचिव, माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षा निदेशालय और राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद को भी भेजी गई हैं।