नासिक। आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले की पृष्ठभूमि में धर्मध्वजारोहण तथा सिंहस्थ समिति के तत्वावधान में शनिवार को पंचवटी स्थित शुक्ल यजुर्वेदीय माध्यंदिन संस्था के सभागार में एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी।
बैठक के दौरान पूर्व महापौर दशरथ पाटिल और नासिक मनपा आयुक्त मनीषा खत्री के बीच जोरदार शाब्दिक बहस हो गई, जिससे कुछ समय के लिए माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया।
सिंहस्थ के नियोजन पर चर्चा के दौरान दशरथ पाटिल द्वारा आयुक्त मनीषा खत्री के संदर्भ में की गई टिप्पणी पर उपस्थित लोगों ने नाराजगी जताई। पाटिल ने अपने पूर्व अनुभवों का हवाला देते हुए कहा, आपने नासिक का कुंभ नहीं देखा है, मैंने कुंभ का सफल आयोजन किया है। उन्होंने आयुक्त पर आस्था से जुड़े गंभीर आरोप भी लगाए, जिस पर आयुक्त मनीषा खत्री ने कड़ा ऐतराज जताते हुए करारा जवाब दिया।
बैठक के इस घटनाक्रम के बाद पंचमुखी हनुमान मंदिर की भूमि से जुड़े आरक्षण का मामला फिर गरमा गया है। नासिक मनपा के नगर नियोजन विभाग द्वारा शासन को भेजे गए पत्र में मौजे नासिक स्थित सर्वे संख्या 294/अ के पब्लिक एमेनिटी आरक्षण से संबंधित पूरी प्रक्रिया का उल्लेख है।
इस स्थान पर श्रीराम मंदिर और पंचमुखी हनुमान मंदिर स्थित हैं। महापालिका महासभा ने 2019 और 2022 में प्रस्ताव पारित कर इस क्षेत्र को आरक्षण से मुक्त करने की प्रक्रिया को मंजूरी दी थी। इसके बाद 2025 में इसे आवासीय क्षेत्र में शामिल करने की प्रशासनिक मंजूरी दी गई।
विशेष बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान दशरथ धर्माजी पाटिल ने 11 अप्रैल 2025 को इस प्रस्ताव पर अपनी आधिकारिक आपत्ति दर्ज कराई थी। उनकी आपत्तियों पर सुनवाई के बाद नगर निगम का अभिप्राय राज्य सरकार के अंतिम निर्णय के लिए भेजा गया है। इसी आपत्ति की पृष्ठभूमि के कारण कुंभ मेले के नियोजन की यह बैठक विवादों के घेरे में आ गई।
बैठक में पुरोहित संघ के मुख्य ट्रस्टी व सिंहस्थ समिति के अध्यक्ष सतीश शुक्ल, पुरोहित संघ के अध्यक्ष चंद्रशेखर पंचाक्षरी, महापौर हिमगौरी आहेर आडके, पूर्व महापौर सतीश कुलकर्णी, पूर्व विधायक बालासाहेब सानप और मनपा आयुक्त मनीषा खत्री सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी एवं संत-महंत उपस्थित थे।