मंदिर में महर्षि गौतम, गंगा माता और गोदावरी माता की प्रतिमाएं हैं।
मंदिर की धार्मिक परंपरा लगभग 700 साल पुरानी बताई जाती है।
1775 में गोपिकाबाई पेशवे ने यहां पत्थर का सभा मंडप बनवाया था।
सिंहस्थ कुंभ की पूरी अवधि में श्रद्धालु मंदिर में दर्शन कर सकेंगे।
Nashik Simhastha Kumbh Gautami Ganga Godavari Temple Opens After 12 Years: नासिक में रामकुंड के उत्तरी छोर पर स्थित और सिंहस्थ कुंभमेले से सीधा संबंध रखने वाले प्राचीन सिंहस्थ श्री गौतमी गंगा गोदावरी मंदिर के कपाट पूरे 12 वर्षों के अंतराल के बाद शनिवार 31 अक्टूबर को फिर से खोल दिए गए।
सिंहस्थ महाकुंभ के धर्मध्वजारोहण समारोह के पावन अवसर पर साधु-संतों, मह महंतों और पुरोहितों के हाथों विधिवत पूजा-अर्चना एवं जलाभिषेक के बाद मंदिर को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया।
इसके साथ ही 12 वर्षों से इस पल का इंतजार कर रहे श्रद्धालुओं को मां गंगा, गोदावरी और महर्षि गौतम के दर्शन का दुर्लभ सौभाग्य प्राप्त हुआ। रामकुंड के उत्तर दिशा में स्थित इस मंदिर की लगभग 700 वर्षों पुरानी धार्मिक परंपरा बताई जाती है।
हर 12 वर्ष में सिंहस्थ कुंभ के दौरान ही यह मंदिर खोला जाता है और कुंभ की पूरी अवधि में श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खुला रहता है। कुंभपर्व समाप्त होने के बाद मंदिर के कपाट पुनः बंद कर दिए जाते हैं। यही कारण है कि इस मंदिर के दर्शन करना श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का विषय है।
मंदिर के गर्भगृह में महर्षि गौतम, गंगा माता और गोदावरी माता की प्रतिमाएं विराजमान हैं। इस मंदिर की एक और ऐतिहासिक विशेषता यह है कि ई.स. 1775 में गोपिकाबाई पेशवे ने यहां एक पत्थर का सभा मंडप बनवाया था। इस वजह से मंदिर को धार्मिक महत्व के साथ-साथ समृद्ध ऐतिहासिक विरासत भी प्राप्त है।
सिंहस्थ कुंभ मेले की पृष्ठभूमि में मंदिर परिसर में रंग-रोगन, टाइल्स बदलने, जल रिसाव रोकने और अन्य सौंदर्यीकरण के कार्य किए गए थे। 12 वर्षों के बाद मंदिर के कपाट खुलने को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्सुकता थी।
धर्म ध्वजारोहण के शुभ मुहूर्त पर मंदिर के खुल जाने से रामकुंड परिसर के धार्मिक उत्साह में और वृद्धि हो गई है। आगामी सिंहस्थ पर्व के दौरान देश भर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह मंदिर आस्था का एक प्रमुख केंद्र रहेगा।