सिंहस्थ कुंभ से दुनिया में गूंजेगी महाराष्ट्र की पहचान, शिंदे बोले- 35 हजार करोड़ रुपये से बदलेंगी सुविधाएं

Eknath Shinde In Nashik Simhastha Kumbh: सिंहस्थ कुंभ के लिए नासिक-त्र्यंबकेश्वर में 35 हजार करोड़ रुपये के विकास कार्य जारी हैं। शिंदे के अनुसार, करीब 12 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है।
Droupadi Murmu And Eknath Shinde In Nashik Simhastha Kumbh
नासिक सिंहस्थ कुंभ में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे(फोटो नवभारत)
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Highlights

  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रामकुंड और कुशावर्त तीर्थ पर धर्मध्वजारोहण किया।

  • एकनाथ शिंदे ने इसे नारीशक्ति और सनातन परंपरा के सम्मान का प्रतीक बताया।

  • गोदावरी तट पर सामूहिक शंखनाद को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में स्थान मिला है।

Nashik Simhastha Kumbh Development Projects: सिंहस्थ महाकुंभ केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की सनातन परंपरा, सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक एकता का वैश्विक उत्सव बनने जा रहा है। इस महाकुंभ के जरिए महाराष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत की पहचान पूरी दुनिया तक पहुंचेगी। महाकुंभ क्षेत्र में करीब 35 हजार करोड़ रुपये के विकास कार्य प्रगतिपथ पर हैं। यह जानकारी उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने दी।

नारीशक्ति और सनातन परंपरा का सम्मान

नासिक के रामतीर्थ (रामकुंड) और त्र्यंबकेश्वर के पवित्र कुशावर्त तीर्थ पर सिंहस्थ कुंभमेले के उपलक्ष्य में आयोजित ध्वजारोहण और ध्वजपूजन समारोह धार्मिक एवं मंगलमय वातावरण में संपन्न हुआ। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों दोनों पवित्र स्थलों पर धर्मध्वजारोहण किया गया। शाम को रामतीर्थ पर आयोजित कार्यक्रम और गोदा महाआरती के दौरान उपमुख्यमंत्री शिंदे ने अपने संबोधन में महाकुंभ के महत्व को रेखांकित किया।

शिंदे ने कहा कि राष्ट्रपति के हाथों धर्मध्वजारोहण होना सिंहस्थ महाकुंभ के इतिहास का ऐतिहासिक क्षण है। एक महिला राष्ट्रपति के हाथों पवित्र धर्मध्वज फहराया जाना नारीशक्ति और सनातन परंपरा के सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की संकल्पना को साकार करता नजर आएगा।

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धर्मध्वजारोहण के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे(फोटो नवभारत)
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12 करोड़ श्रद्धालुओं के स्वागत की तैयारी

उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के मुताबिक, सिंहस्थ महाकुंभ के दौरान देश-विदेश से लगभग 12 करोड़ श्रद्धालुओं के नासिक-त्र्यंबकेश्वर पहुंचने का अनुमान है। इतने बड़े जनसमूह की सुविधाओं के लिए बुनियादी ढांचे, परिवहन और अन्य व्यवस्थाओं से जुड़े करीब 35 हजार करोड़ रुपये के विकास कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन परियोजनाओं का लाभ महाकुंभ के बाद भी नासिक और त्र्यंबकेश्वर के नागरिकों को मिलेगा। करीब 12 करोड़ श्रद्धालुओं, साधु-संतों और यात्रियों के आगमन की संभावना को देखते हुए राज्य सरकार पूरी तरह तैयार है।

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स्थानीय लोगों को मिलेगा रोजगार

शिंदे ने कहा कि सिंहस्थ कुंभ का लाभ केवल साधु-संतों और श्रद्धालुओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए। स्थानीय व्यापारियों, कामगारों और आम नागरिकों को भी रोजगार और आर्थिक अवसर मिलने चाहिए। उन्होंने इस आयोजन को स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक समरसता का आदर्श बनाने की अपील की।

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गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स

उन्होंने यह भी बताया कि कोजागिरी पूर्णिमा पर गोदावरी तट पर हुए सामूहिक शंखनाद को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में स्थान मिला है। महाकुंभ से नासिक की वैश्विक पहचान को और मजबूती मिलने वाली है।