सनातन परंपरा में प्रमुख रूप से 13 अखाड़े माने जाते हैं।
अखाड़ों को शैव, वैष्णव, उदासीन और निर्मल परंपराओं में बांटा जाता है।
वैष्णव अखाड़ों में भगवान राम, कृष्ण और हनुमान प्रमुख आराध्य हैं।
Simhastha Kumbha 13 Akharas Isht Devta: नासिक सिंहस्थ कुंभ के धर्म ध्वजारोहण के बाद अ औपचारिक रूप से कुंभ का आगाज या श्री गणेश हो चुका है लेकिन कहा जाता है की कुंभ मेला का सबसे प्रमुख आकर्षण अखाड़े के द्वारा अमृत या शाही स्नान होता है, जब चांदी सोने के सिंहासन पर बैठकर घोड़े हाथी रथो पर अखाड़े के आचार्य आचार्य महामंडलेश्वर रामानंदाचार्य या जगतगुरु के नेतृत्व में विभिन्न अखाड़े के श्री महंत संत पदाधिकारी और फिर नागा साधु सन्यासी शाही या अमृत स्नान के लिए निकलते हैं तो भारत देश ही नहीं दुनिया भर में सबसे ज्यादा आकर्षण के केंद्र बिंदु बन जाते हैं।
क्योंकि इस समय सभी अखाड़े अपने वैभव के अनुसार अपने संप्रदाय अपने अखाड़े के आराध्य देव को लेकर कुंभ स्नान के लिए निकलते हैं आईए जानते हैं क्या है यह परंपरा? सनातन धर्म की परंपरा में मुख्य रूप से 13 अखाड़े माने जाते हैं। इन्हें विचारधारा और आराध्य देव (इष्टदेव) के आधार पर तीन प्रमुख श्रेणियों-शैव (शिव उपासक), वैष्णव (विष्णु उपासक) और उदासीन/निर्मल संप्रदाय में बांटा गया है। किस अखाड़े के कौन से देव या देवी आराध्य हैं।
इस संप्रदाय के अंतर्गत 7 मुख्य अखाड़े आते हैं, जो शिव के विभिन्न रूपों और उनके परिवार के देवों की पूजा करते हैं। श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा: इनके इष्टदेव भगवान दत्तात्रेय (भगवान शिव के रुद्रावतार) हैं। (नोट: किन्नर अखाड़ा भी इसी अखाड़े के अंतर्गत आता है)। श्री पंचायती निरंजनी अखाड़ा: इनके इष्टदेव भगवान शिव के बड़े पुत्र कार्तिकेय (कार्तिक स्वामी) हैं।
श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा: इनके इष्टदेव भगवान कपिल मुनि हैं। श्री पंच अटल अखाड़ा: यह अखाड़ा भगवान गणेश को अपना इष्टदेव मानता है। श्री पंचदशनाम आवाहन अखाड़ा: इनके आराध्य देव भगवान गणेश और दत्तात्रेय हैं। तपोनिधि श्री आनंद पंचायती अखाड़ा: इस अखाड़े के इष्टदेव भगवान सूर्यदेव (भुवन भास्कर) हैं। श्री पंचदशनाम पंचाग्नि अखाड़ा: इस अखाड़े की आराध्य देवी वेद माता गायत्री हैं।
इस संप्रदाय के साधुओं को 'बैरागी' या 'अलख' भी कहा जाता है, जो भगवान विष्णु और उनके अवतारों की पूजा करते हैं। दिगंबर अनी अखाड़ा: इनके आराध्य देव भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण हैं। निर्वाणी अनी अखाड़ा: इस अखाड़े के इष्टदेव हनुमान जी हैं। निर्मोही अनी अखाड़ा: इनके आराध्य देव भी भगवान श्रीराम हैं।
सिंहस्थ कुंभ के दौरान ये अखाड़े सिख पंथ की महान परंपराओं और सनातन सिद्धांतों से जुड़े हैं। श्री पंचायती बड़ा उदासीन अखाड़ा: इसके पथ-प्रदर्शक गुरु नानक देव जी के पुत्र आचार्य श्री चंद्रदेव जी थे। यह अखाड़ा भगवान ब्रह्मा जी के चारों मानस पुत्रों (सनत, सनंदन, सनातन, सनतकुमार) और श्री चंद्रदेव जी को अपना आराध्य मानता है।
श्री पंचायती नया उदासीन अखाड़ा: इनके इष्टदेव भी गुरु नानक देव जी की वाणी और आचार्य चंद्रदेव जी की परंपराएं हैं। श्री निर्मल पंचायती अखाड़ा: यह अखाड़ा मुख्य रूप से श्री गुरु ग्रंथ साहिब और गुरु मत की शिक्षाओं को अपना आराध्य मानता है, जो निराकार ईश्वर की साधना करते हैं।