रामकुंड पर महा गोदा आरती में करीब 6,233 जनजातीय श्रद्धालु शामिल हुए।
नासिक जिले के 650 गांवों से महिला और पुरुष श्रद्धालु पहुंचे।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सहित राज्यपाल, मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री रहे उपस्थित।
गोदावरी सहित स्थानीय नदियों, तालाबों और पारंपरिक जलस्रोतों के संरक्षण का संकल्प।
सिंहस्थ की स्मृति में रामकुंड और कुशावर्त तीर्थ पर आधारित विशेष डाक टिकटों का अनावरण।
Nashik Ramkund Maha Goda Aarti World Record: सिंहस्थ कुंभपर्व के शुभारंभ अवसर पर नासिक के रामकुंड पर आयोजित महा गोदा आरती में करीब 6,233 जनजातीय श्रद्धालुओं ने सामूहिक सहभागिता की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सहित कई गणमान्य लोगों की मौजूदगी में 650 गांवों से आए महिला-पुरुषों ने आरती की। इस दौरान गोदावरी और स्थानीय जलस्रोतों के संरक्षण का संकल्प लिया गया। आयोजन में विश्व कीर्तिमान बनने का दावा किया गया।
नासिक, सिंहस्थ कुंभपर्व के शुभारंभ अवसर पर नासिक के रामकुंड पर आयोजित भव्य महा गोदा आरती में करीब 6,233 जनजातीय श्रद्धालुओं ने सामूहिक सहभागिता कर विश्व कीर्तिमान बनाने का दावा किया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मौजूदगी में हुए इस आयोजन में जिले के 650 गांवों से आए महिला और पुरुष श्रद्धालु शामिल हुए। मंत्रोच्चार, शंखनाद और आरती की ज्योतियों से गोदातट भक्तिमय हो उठा।
इस अवसर पर राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार, कुंभमंत्री गिरीश महाजन सहित कई मंत्री और संत-महंत उपस्थित थे। धार्मिक अनुष्ठान के साथ गोदावरी नदी और स्थानीय जलस्रोतों के संरक्षण का संकल्प भी लिया गया।
आयोजन में नासिक जिले के 650 गांवों की सहभागिता रही। प्रत्येक गांव से छह पुरुष और चार महिलाओं को शामिल करने की योजना थी। कुल करीब 6,233 श्रद्धालु रामकुंड पहुंचे। निफाड, त्र्यंबकेश्वर, दिंडोरी, सुरगाणा और हरसूल सहित विभिन्न क्षेत्रों के गांवों से श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
रामकुंड पर सामूहिक आरती के बाद सभी 650 गांवों में भी महा गोदा आरती आयोजित करने का संकल्प लिया गया। इसके जरिए धार्मिक आयोजन को गांव-गांव तक पहुंचाने की पहल की गई।
बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए केटीएचएम महाविद्यालय में भोजन और कपड़े बदलने की विशेष व्यवस्था की गई थी। रामतीर्थ गोदावरी सेवा समिति ने आयोजन का संयोजन किया।
महा गोदा आरती के माध्यम से गोदावरी नदी के साथ स्थानीय नदियों, नालों, तालाबों और पारंपरिक जलस्रोतों को संरक्षित करने का संदेश दिया गया। जल प्रदूषण रोकने और प्रकृति संरक्षण के प्रति जनजागृति बढ़ाना आयोजन का प्रमुख उद्देश्य रहा।
आयोजकों ने धार्मिक आस्था को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए जलस्रोतों के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी विकसित करने पर जोर दिया।
सिंहस्थ महाकुंभ 2027 के अवसर पर नासिक और त्र्यंबकेश्वर की धार्मिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए रामकुंड और कुशावर्त तीर्थ पर आधारित विशेष डाक टिकट तैयार किए गए हैं। भारतीय डाक विभाग की माय स्टैम्प योजना के तहत बनाए गए इन टिकटों का 31 अक्टूबर को सिंहस्थ ध्वजारोहण समारोह के अवसर पर अनावरण किया गया।
रामकुंड और कुशावर्त तीर्थ सिंहस्थ महाकुंभ के दो प्रमुख धार्मिक केंद्र हैं। रामकुंड का संबंध वैष्णव परंपरा से, जबकि कुशावर्त तीर्थ का संबंध शैव परंपरा से है। इन दोनों तीर्थस्थलों के महत्व को देखते हुए डाक टिकटों के लिए इनका चयन किया गया। इनके माध्यम से सिंहस्थ की आध्यात्मिक परंपरा और नासिक -त्र्यंबकेश्वर की सांस्कृतिक विरासत को देशभर तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है।