नासिक महानगरपालिका (सोर्सः सोशल मीडिया)
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नासिक मनपा में बहुमत के बावजूद सभापतियों का चुनाव बाकी; मनोनीत सदस्य भी अटके, कामकाज धीमा

Leader Of Opposition: नासिक मनपा में जनप्रतिनिधियों के चुने जाने के छह महीने बाद भी सभागृह नेता और विपक्ष नेता का चुनाव लंबित है। समितियों के सदस्यों का चयन हो चुका है।

आंचल लोखंडे

Nashik Municipal Corporation: चार साल के प्रशासकीय शासन के बाद बड़ी उम्मीदों के साथ नासिकवासियों ने मनपा में जनप्रतिनिधि चुने। भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिलने से शहर का कामकाज तेजी से आगे बढ़ने की उम्मीद थी। लेकिन चुनाव के 6 महीने बीतने के बावजूद मनपा के कई महत्वपूर्ण पद खाली हैं। ऐसे में बहुमत होने के बावजूद सत्तारूढ़ भाजपा का कामकाज इतना धीमा क्यों है, यह सवाल उठ रहा है।

महापौर पद पर हिमगौरी आडके-आहेर और उपमहापौर पद पर विलास शिंदे के चुने जाने के बाद मनपा के कामकाज में तेजी आने की उम्मीद थी। इसके बाद स्थायी समिति के सदस्यों और सभापति का चुनाव हुआ। लेकिन, प्रभाग समितियों के गठन में करीब चार महीने लग गए। तीन दिन पहले पांच विभिन्न विषय समितियों के सदस्यों का चयन किया गया है और अब उनके सभापतियों का चुनाव होना बाकी है। इससे मनपा की समितियों की पूरी संरचना तैयार होने में भी अपेक्षा से अधिक समय लग रहा है।

सभागृह नेता और विपक्ष नेता का पद खाली

मनपा सदन के महत्वपूर्ण पद सभागृह नेता और विपक्ष नेता का चुनाव अभी तक नहीं हुआ है। खास बात यह है कि भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत होने के बावजूद सभागृह नेता का चुनाव लंबित है। वहीं, विपक्ष नेता का चयन नहीं होने से सदन में विपक्ष की आधिकारिक भूमिका और जिम्मेदारी भी तय नहीं हो सकी है। इसके अलावा मनोनीत सदस्यों की नियुक्तियां भी अब तक नहीं हुई हैं। इससे मनपा में जनप्रतिनिधियों की पूरी संरचना अभी तक पूर्ण नहीं हो पाई है।

सभापतियों का चुनाव बाकी

चुनाव के छह महीने बाद भी विभिन्न पदों के चुनाव और नियुक्तियों की धीमी गति से नासिककरों की उम्मीदों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। नासिक में सिंहस्थ कुंभ मेले की पृष्ठभूमि में हजारों करोड़ रुपये के विकास कार्य चल रहे हैं। सड़क, जलापूर्ति, ड्रेनेज, कचरा प्रबंधन, यातायात और शहर की मूलभूत सुविधाओं से जुड़े कई मुद्दे लंबित हैं। ऐसे में यदि महानगरपालिका की निर्णय प्रक्रिया ही धीमी रही, तो विकास कार्यों को अपेक्षित गति कैसे मिलेगी, यह बड़ा सवाल है।

मनोनीत सदस्य भी अटके

चार साल के प्रशासकीय शासन के बाद नासिककर अब निर्णयक्षम और गतिशील महानगरपालिका की उम्मीद कर रहे हैं। लेकिन विभिन्न समितियों के गठन में लग रहा समय और लंबित नियुक्तियों को देखते हुए सत्तारूढ़ दल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। बहुमत होने के बावजूद फैसलों में इतनी देरी क्यों, यह सवाल अब चर्चा में है। लंबित सभी चुनाव और नियुक्तियां जल्द पूरी कर मनपा के कामकाज को गति देना जरूरी है।

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