Nashik Builders Fraud Case: नासिक में म्हाडा के घरों के नाम पर करोड़ों रुपये का घोटाला सामने आया है। नियमों के अनुसार बड़े आवासीय परियोजनाओं में 20 प्रतिशत जमीन ईडब्ल्यूएस और एलआईजी के लिए आरक्षित रखना अनिवार्य होता है।
लेकिन नासिक के 49 बिल्डरों पर प्रशासन को गुमराह कर जमीन के अवैध टुकड़े करके इस कोटे को हड़पने का आरोप लगा है। इस मामले में 49 बिल्डरों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
आरोप है कि करीब 300 करोड़ रुपये का सरकारी राजस्व डुबोकर सरकार के साथ धोखाधड़ी की गई। जिलाधिकारी की जांच रिपोर्ट के बाद इस घोटाले की पुष्टि हुई। नासिक के सरकारवाड़ा पुलिस थाने में इन सभी 49 बिल्डरों के खिलाफ धोखाधड़ी के मामले दर्ज किए गए हैं।
नगर विकास विभाग की वर्ष 2013 और 2017 की अधिसूचनाओं के अनुसार, जिस जमीन का क्षेत्रफल 4000 वर्ग मीटर से अधिक है वहां आवासीय परियोजना बनाते समय 20 प्रतिशत जमीन आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और अल्प आय वर्ग के लिए आरक्षित रखना जरूरी होता है लेकिन इस नियम से बचने के लिए बिल्डरों ने चालाकी से घोटाला किया।
4000 वर्ग मीटर से अधिक जमीन को कागजों में कई हिस्सों में बांटकर उसे 4000 वर्ग मीटर से कम दिखाया गया, जबकि वास्तव में 8 नवंबर 2013 से पहले जमीन का कोई माप नहीं हुआ था लेकिन उससे पहले ही उपविभाजन की माप होने का दिखावा कर फर्जी माप नक्शे तैयार किए गए। इन नक्शों को तहसील कार्यालय में जमा कर प्रशासन को गुमराह किया गया और म्हाडा का आरक्षित कोटा हड़प लिया गया।
राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने सोमवार को विधान परिषद में घोषणा करते हुए कहा कि नंदुरबार जिले के नवपुर तालुका के गंगापुर में भूमि अधिग्रहण घोटाले की गहन जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया जाएगा, जांच समिति की अध्यक्षता नासिक विभागीय आयुक्त प्रवीण गेडाम करेंगे और इसमें वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी शामिल होंगे।
बावनकुले ने स्पष्ट किया कि समिति की रिपोर्ट आने के बाद दोषी अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाएगी। विधायक चंद्रकांत रघुवंशी ने इस मामले की ओर मंत्री का ध्यान आकर्षित किया।
साल 2023 में घोषित मूल आवंटन में अनुसूचित जनजातियों के भूस्वामियों के नाम शामिल थे। हालांकि अंतिम आवंटन के बाद आरोप है कि राजस्व अधिकारियों ने भूस्वामियों के नाम बदल दिए और गैर-अनुसूचित जनजातियों के नाम शामिल कर दिए।
सहायक जिला मजिस्ट्रेट ने राजस्व विभाग के आदेशों का हवाला देते हुए यह फिर से आवंटन किया था। इस बदलाव के कारण पारिश्रमिक की राशि 8 करोड़ 10 लाख से बढ़कर 159 करोड़ 75 लाख रुपये हो गई। इससे बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं की संभावना बढ़ जाती है।
नासिक के जिलाधिकारी ने 30 सितंबर 2024 को एक उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की। अतिरिक्त जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बनी इस समिति में भूमि अभिलेख और तहसील कार्यालय के अधिकारी शामिल थे।
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समिति ने म्हसरूल, आडगांव, गंगापुर और देवलाली समेत कई इलाकों के 108 मामलों की गहन जांच की। इनमें से 49 मामलों में साफ तौर पर फर्जीवाड़ा सामने आया और सरकार को करीब 300 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होने की बात सामने आई।