Nashik Kumbh Development Controversy: नासिक कुंभ मेले की पृष्ठभूमि में शहर में विकास कार्यों को तेजी मिली है, वहीं पेड़ों की कटाई का मुद्दा बेहद संवेदनशील और विवादास्पद बन गया है।
पर्यावरण संरक्षण और बुनियादी ढांचे के विकास के बीच टकराव अब खुलकर सामने आ गया है। शहर में वृक्षप्रेमी और नगर निगम प्रशासन दो गुटों में बंट गए हैं, जिससे इस विवाद ने संघर्ष का रूप ले लिया है।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने शहर में पेड़ों की कटाई पर 28 अप्रैल तक अस्थायी रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद कुछ स्थानों पर विकास की मांग करने वाले नागरिक आक्रामक हो गए हैं। नासिक नगर निगम का कहना है कि कुंभ मेले के लिए सड़क चौड़ीकरण, ड्रेनेज और गैस पाइपलाइन जैसे कार्यों को समय पर पूरा करना अनिवार्य है। नासिक में वर्तमान में लगभग 32 लाख पेड़ हैं। वृक्ष गणना जारी है और अंतिम आंकड़ों में 18 लाख पेड़ों की और वृद्धि होने की संभावना है।
कुंभ मेले के तहत बुनियादी ढांचे के कार्यों में बाधा बनने वाले करीब 1500 पेड़ों को हटाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। प्रशासन के अनुसार, कई पेड़ सड़कों के बीचों-बीच हैं, जो जानलेवा दुर्घटनाओं का कारण बनते है। वर्ष 2014 से 2019 के बीच इन पेड़ों के कारण हुई दुर्घटनाओं में 31 लोगों की जान गई थी। इसके बाद भी मृतकों का आंकड़ा 10 से 15 के बीच होने का अनुमान है। तत्कालीन पुलिस आयुक्त विश्वास नांगरे पाटिल ने वर्ष 2019 में ही मनपा को पत्र लिखकर इन पेड़ों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।
दूसरी ओर, पर्यावरण प्रेमी संगठन पेड़ों की कटाई का तीव्र विरोध कर रहे हैं, उनकी प्रमुख मांगे निम्नलिखित हैं पेड़ों को काटने के बजाय वैज्ञानिक तरीके से उनका पुनरीक्षण किया जाए, सड़कों के डिजाइन में बदलाव कर पेड़ों को बचाने की कोशिश हो, यदि पेड़ काटना अनिवार्य हो, तो उसके बदले भारी मात्रा में नए पेड़ लगाए जाएं।
प्रशासन अब विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाने की चुनौती से जूझ रहा है। 28 अप्रैल के बाद होने वाला निर्णय शहर की हरियाली और विकास की दिशा तय करेगा।
शहर में विकास कायों में बाधा बनने वाले पेड़ों को हटाया जा रहा है। कुछ पेड़ों का पुनरोपण भी किया गया है और उनका जीवित रहने का प्रतिशत संतोषजनक है।
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कुछ पेड़ों के कारण दुर्घटनाएं होती हैं। इसलिए स्थानीय लोगों ने उन्हें हटाने की मांग की है, हालांकि, 28 अप्रैल तक रोक होने के कारण फिलहाल यह प्रक्रिया रुकी हुई है।
-उद्यान अधीक्षक, विवेक भदाणे
पेह दोबारा लगाए सकते हैं, लेकिन खोई हुई जान वापस नहीं लाई जा सकती। इसलिए दुर्घटनाओं का कारण बनने वाले पेड़ों को हटाना जरूरी है। कुछ लोग विरोध कर रहे हैं, लेकिन उन्हें वास्तविकता समझनी चाहिए, पिछले कुंभ मेले में जिन पेड़ों को हटाना जरूरी था, वहीं अब हटाए जा रहे हैं।
-उपमहापौर, विलास शिंदे