रामबाबू चौबे
Nashik Simhastha Preparation: नासिक सिंहस्थ 2026/27 के लिए महाराष्ट्र सरकार और नासिक प्रशासन इस समय पूरे दमखम के साथ तैयारियों में जुटा हुआ है। इस बार महाराष्ट्र सरकार एक भारी-भरकम बजट के साथ उत्तर प्रदेश के प्रयागराज महाकुंभ की भव्य व्यवस्थाओं को टक्कर देने की तैयारी कर रही है। इसके लिए प्रयागराज महाकुंभ के 11 बिंदुओं का बेहद बारीकी और गहनता से अध्ययन किया जा रहा है।
सरकार का पूरा प्रयास है कि देश में कहीं भी यह संदेश नहीं जाना चाहिए कि उत्तर प्रदेश के योगी मॉडल के मुकाबले महाराष्ट्र सरकार का मॉडल कहीं से भी कमजोर पड़ रहा है। यही कारण है कि महाराष्ट्र प्रशासन और पुलिस विभाग के कई बड़े अधिकारी खुद प्रयागराज जाकर वहां का कुंभ मंत्र सीख चुके हैं और अब उसे नासिक सिंहस्थ में धरातल पर उतारने की तैयारी कर रहे हैं।
लेकिन इस महा-तैयारी के बीच एक बहुत बड़ा और गंभीर सवाल खड़ा हो गया है। देश के चार स्थानों पर कुंभ का आयोजन किया जाता है, लेकिन इनमें से सबसे कम कवरेज नासिक कुंभ को ही मिलता है। आखिरकार ऐसा क्यों होता है कि नेशनल और इंटरनेशनल मीडिया इस महाआयोजन से पूरी तरह दूरी बना लेती हैं?
महाराष्ट्र सरकार अखाड़ों, साधु-संतों, महंतों, जगतगुरुओं, मंडलेश्वरों और 13 अखाड़ों को दी जाने वाली सुविधाओं और क्राउड मैनेजमेंट के मामले में तो प्रयागराज महाकुंभ के मॉडल की हूबहू कॉपी कर रही है। इस मोर्चे पर सरकार काफी हद तक सफल भी दिखाई दे रही है।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि पूरी व्यवस्था और रणनीति के एक-एक बिंदु पर अध्ययन करने के बावजूद महाराष्ट्र सरकार मीडिया को पूरी तरह से भूल चुकी है। प्रयागराज में जिस तरह की व्यवस्था और सुविधाएं स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया को दी जाती हैं, उसके लिए नासिक सिंहस्थ की तैयारियों में न तो कोई बजट तय किया गया है और न ही प्रशासन के स्तर पर इस पर कोई चर्चा हो रही है।
प्रयागराज कुंभ, महाकुंभ या अर्धकुंभ के दौरान कवरेज को सुगम बनाने के लिए मीडिया को तीन अलग-अलग भागों में विभाजित किया जाता है, जिन्हें बेहतरीन सुविधाएं दी जाती हैं।
लोकल मीडिया: स्थानीय प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के सभी पत्रकारों के लिए कुंभ मेला क्षेत्र में पूरी तरह से निशुल्क ऑफिस की व्यवस्था की जाती है।
नेशनल मीडिया: देश के सभी बड़े अखबारों और चैनलों से आए राष्ट्रीय स्तर के पत्रकारों को रुकने और काम करने के लिए निशुल्क कॉटेज दिए जाते हैं।
इंटरनेशनल मीडिया: अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों के लिए अलग से लगभग 100 लग्जरी कॉटेज का एक पूरा सुसज्जित कैंपस तैयार किया जाता है। यहां उनके निशुल्क ठहरने की व्यवस्था तो होती ही है, साथ ही बहुत ही कम दरों पर भोजन के लिए विशेष कैंटीन की सुविधा भी दी जाती है।
लाइव स्टूडियो और विशेष रूट: सभी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय चैनलों के लिए विशेष स्टूडियो की व्यवस्था की जाती है ताकि वे मेले की हर गतिविधि को लाइव प्रसारित कर सकें। यही नहीं, मुख्य स्नान या अमृत स्नान के दिनों में मीडियाकर्मियों के लिए एक बिल्कुल अलग रूट तय किया जाता है, ताकि वे बिना किसी बाधा के मुख्य स्नान घाटों तक पहुंचकर लाइव कवरेज कर सकें।
इसके विपरीत, नासिक प्रशासन और महाराष्ट्र सरकार द्वारा ऐसी कोई भी बुनियादी सुविधा और व्यवस्था मीडिया जगत को नहीं दी जाती है। यही मुख्य कारण है कि आवश्यक व्यवस्थाओं और सुविधाओं के अभाव में नेशनल और इंटरनेशनल मीडिया खुद को नासिक कुंभ की कवरेज से दूर कर लेती है और इसका सीधा नकारात्मक प्रभाव इसके प्रचार और कवरेज पर पड़ता है।
ऐसे में यह बड़ा सवाल उठना लाजिमी है कि जब भीड़ नियंत्रण और साधु-संतों की व्यवस्थाओं के लिए प्रयागराज के सफल मॉडल की कॉपियां बनाई जा रही हैं, तो इस पावन पर्व को दुनिया भर के करोड़ों लोगों तक पहुंचाने वाले मीडिया जगत की सुविधाओं के मामले पर महाराष्ट्र सरकार आखिर मौन क्यों बैठी है?