Nashik Pipeline Projects: नासिक प्रशासन का दावा है कि जल जीवन मिशन स्कीम के तहत जिले में 805 जगहों पर पाइपलाइन परियोजना पूरी हो चुकी हैं, लेकिन सरकार से फंड मिलने में लंबे समय से रुकावट के कारण कई जगहों पर काम रुका हुआ है। क्योंकि कई कॉन्ट्रैक्टर नए हैं, इसलिए अनुभव की कमी के कारण ये काम समय पर पूरे नहीं हो पाए हैं।
प्रशासन पर 34 करोड़ का बकाया है। जिसमें से आधे से भी कम, सिर्फ 13 करोड़ मिले हैं। इसलिए, स्कीम मार्च 2024 तक पूरी नहीं हुई। केंद्र सरकार ने अब इस स्कीम की डेडलाइन 2027 तक बढ़ा दी है।
जिले की 800 में से 733 में असल में पानी की सप्लाई शुरू हो गई है, लेकिन, 422 स्कीम का काम अभी भी रुका हुआ है। समय पर नहीं मिले ठेकेदार जानकारी के अनुसार एक ही समय में बहुत सारे योजनओं के कामों को मंजूरी मिली थी, इसलिए पानी सप्लाई स्कीमों का काम करने के लिए कोई कॉन्ट्रैक्टर मौजूद नहीं होने की वजह से कई काम एक-एक कॉन्ट्रैक्टर को दे दिए गए, उन्होंने सब कॉन्ट्रैक्टर रख लिए और काम में देरी होती बगई।
नासिक जिला परिषद के रूरल वॉटर सप्लाई डिपार्टमेंट ने जल जीवन मिशन के तहत 1,410 करोड़ रुपये की 1,222 स्कीमों को मंजूरी दी थी। इन कामों के लिए दिसंबर 2022 तक वर्क ऑर्डर भी दे दिए गए थे, लेकिन 2025 के आखिर तक सिर्फ 805 स्कीमें ही पूरी हुई हैं। बाकी काम अधूरे हैं, और पाँच स्कीमों पर अभी काम शुरू भी नहीं हुआ है।
चूंकि ग्राम पंचायतों से पब्लिक का कंट्रीब्यूशन इकट्ठा नहीं हुआ है। इसलिए यह रकम संबंधित कॉन्ट्रैक्टर से डायवर्ट की जा रही है। इसमें नासिक जिला परिषद ने कॉन्ट्रैक्टर के मौजूदा पेमेंट से पब्लिक के कट्रीब्यूशन का दस परसेंट, यानी लगभग 100 करोड़ रुपये काट लिए है। पूरे राज्य में ऐसी कटौतियों का आंकड़ा 2200 करोड़ रुपये से अधिक है।
इन कामों के अधूरे होने का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राज्य सरकार ने पिछले हफ्ते सिर्फ 13 करोड़ रुपये जारी किए, जबकि नासिक जिला परिषद के रूरल वॉटर सप्लाई डिपार्टमेंट पर जल जीवन मिशन की पानी सप्लाई स्कीमों को पूरा करने के बावजूद कॉन्ट्रैक्टरों का लगभग 100 करोड़ रुपये बकाया था। यह फंड सिर्फ आदिवासी इलाकों में स्कीम के कामों के लिए है। आदिवासी इलाकों में स्कीम को पूरा करने के लिए कॉन्ट्रैक्टर ने जी पेमेंट जमा किया है,, उसकी रकम भी 34 करोड़ रुपये है।
इसलिए, जब यह सवाल उठा कि इन कॉन्ट्रैक्टर को कितना और कैसे। पेमेंट किया जाए, तो डिपार्टमेंट ने उनमें से हर एक को उनकी मांगी गई पेमेंट का 35 परसेंट देने का फैसला किया है।
केंद्र के जाल जीवन मिशन के तहत लागू की जा रही वॉटर सप्लाई स्कीमों का 45 परसेंट खर्च उठाएंगी, और बाकी दस परसेंट ग्राम पंचायतों को पब्लिक कंट्रीब्यूशन से जुटाना होगा, स्कीम का प्लान बनाते समय, ग्राम पंचायतों से न तो इस पब्लिक कंट्रीब्यूशन के बारे में सोचा गया और न ही उन्हें बताया गया। इस वजह से, ग्राम पंचायतों से पब्लिक कंट्रीब्यूशन मांगना मुमकिन नहीं है।