नासिक शंखनाद रिकॉर्ड सोर्स: सोशल मीडिया
नासिक

बनेगा विश्व रिकॉर्ड, गोदातीर पर 501 शंखों का निनाद; नासिक सिंहस्थ कुंभ के स्वागत में बना अनूठा माहौल

Nashik Shankh Naad Record: नासिक के गोदातीर पर 501 शंखवादकों ने सामूहिक शंखनाद किया। सिंहस्थ कुंभ 2027-28 के ध्वजारोहण समारोह में 31 अक्टूबर को 251 शंखवादक फिर शंखनाद करेंगे।

मनीषा बोंदरे

Highlights

  • कोजागिरी पूर्णिमा पर नासिक के गोदातीर में 501 शंखवादकों ने किया सामूहिक शंखनाद।

  • सिंहस्थ कुंभ मेले के स्वागत में विश्व रिकॉर्ड बनाने का प्रयास।

  • आयोजकों के अनुसार, पहले दर्ज 303 लोगों के सामूहिक शंखनाद रिकॉर्ड को पीछे छोड़ने की पहल।

  • 31 अक्टूबर को ध्वजारोहण समारोह में 251 शंखवादक एक साथ शंखनाद करेंगे।

  • कुंभ मेला प्राधिकरण के आयुक्त शेखर सिंह ने भारतीय परंपरा में शंखनाद के महत्व को बताया।

Nashik Godavari Ghat 501 Shankh Naad world record Simhasth Kumbh: नासिक में कोजागिरी पूर्णिमा के अवसर पर गोदातीर पर 501 शंखवादकों ने एक साथ शंखनाद किया। सिंहस्थ कुंभ 2027-28 के स्वागत में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य सामूहिक शंखनाद का विश्व रिकॉर्ड बनाने के साथ भारतीय धार्मिक परंपरा को व्यापक पहचान दिलाना है। 31 अक्टूबर को कुंभ के ध्वजारोहण समारोह में 251 शंखवादक फिर एक साथ शंखनाद करेंगे।

नासिक में 501 शंखों का निनाद, विश्व रिकॉर्ड बनाने की पहल

नासिक, सिंहस्थ कुंभ मेला 2027-28 की तैयारियों के बीच नासिक के गोदातीर पर रविवार को कोजागिरी पूर्णिमा के अवसर पर भव्य सामूहिक शंखनाद का आयोजन किया गया। गंजा देवमामलेदार मैदान के पास आयोजित इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम में 501 शंखवादकों ने एक साथ शंखनाद कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इस पहल के जरिए सामूहिक शंखनाद का विश्व रिकॉर्ड बनाने का प्रयास किया गया।

नासिक -त्र्यंबकेश्वर कुंभ मेला प्राधिकरण और गुणगौरव न्यास द्वारा संचालित अनंत विजय शंखनाद दल की पहल पर यह कार्यक्रम आयोजित हुआ। इसका उद्देश्य भारतीय धार्मिक परंपराओं को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करना और नासिक की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान दिलाना है।

303 लोगों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ने का प्रयास

आयोजकों के अनुसार, एक साथ शंखनाद करने वाले 303 लोगों के पूर्व दर्ज रिकॉर्ड को पीछे छोड़ने के उद्देश्य से 501 शंखवादकों ने इस आयोजन में हिस्सा लिया। हालांकि, विश्व रिकॉर्ड बनने की आधिकारिक पुष्टि संबंधित रिकॉर्ड संस्था की घोषणा के बाद ही होगी।

भारतीय परंपरा में शंखनाद को शुभ कार्यों की शुरुआत और मंगल अवसरों का प्रतीक माना जाता है। मंदिरों, धार्मिक अनुष्ठानों और मांगलिक कार्यक्रमों में शंखध्वनि का विशेष महत्व है। इसी परंपरा को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से सामूहिक शंखनाद का आयोजन किया गया।

गोदा आरती से भक्तिमय हुआ गोदातीर

कार्यक्रम के दौरान गोदावरी नदी के तट पर धार्मिक उत्साह और आस्था का माहौल देखने को मिला। शाम 7 बजे आयोजित गोदा आरती ने आयोजन के आध्यात्मिक वातावरण को और मजबूत किया। सामूहिक शंखनाद और आरती के माध्यम से परंपरा, आस्था तथा सामूहिक सहभागिता का संगम नजर आया।

सिंहस्थ कुंभ की तैयारियों के बीच हुए इस आयोजन ने नासिक और त्र्यंबकेश्वर की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान को भी रेखांकित किया। आयोजकों का उद्देश्य कुंभ को धार्मिक आयोजन के साथ भारतीय संस्कृति और परंपराओं के व्यापक प्रदर्शन का अवसर बनाना है।

आयुक्त शेखर सिंह ने बताया शंखनाद का महत्व

नासिक -त्र्यंबकेश्वर कुंभ मेला प्राधिकरण के आयुक्त शेखर सिंह ने कहा कि शंखनाद भारतीय सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। शुभ कार्यों की शुरुआत शंखध्वनि से करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। सिंह के अनुसार, सिंहस्थ कुंभ की पृष्ठभूमि में 501 लोगों का एक साथ शंखनाद करना नासिक के लिए विशेष अवसर है।

31 अक्टूबर को ध्वजारोहण में फिर गूंजेंगे शंख

अब 31 अक्टूबर को होने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले के ध्वजारोहण समारोह की तैयारियां महत्वपूर्ण चरण में हैं। इस समारोह में इसी समूह के 251 शंखवादक ध्वजारोहण के ठीक समय सामूहिक शंखनाद करेंगे। इसके जरिए प्राचीन धार्मिक परंपरा को कुंभ के मंगलारंभ से जोड़ने की योजना है।

इस आयोजन से सिंहस्थ कुंभ के प्रति धार्मिक उत्साह बढ़ाने और नासिक की सांस्कृतिक विरासत को व्यापक पहचान दिलाने की उम्मीद है।

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