गोदाघाट की बदहाली (सोर्सः सोशल मीडिया)
नासिक

Nashik News: गोदाघाट पर 'रामकाल पथ' के विकास कार्यों की खुली पोल, बाढ़ के पानी में उखड़ीं नई टाइल्स

Godaghat Development Work: नासिक के गोदाघाट पर बाढ़ के बाद रामकाल पथ योजना के तहत किए गए विकास कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं। जिसके बाद कांग्रेस ने आंदोलन की चेतावनी दी है।

आंचल लोखंडे

Nashik Development Project: गोदावरी नदी में हाल ही में आई बाढ़ ने स्मार्ट सिटी नासिक की रामकाल पथ योजना के तहत गोदाघाट पर किए गए सौंदर्यीकरण और विकास कार्यों की गुणवत्ता की पोल खोलकर रख दी है। बाढ़ के पानी के तेज बहाव में नई लगाई गई टाइल्स उखड़ गई हैं, जिससे घाट पर जगह-जगह पत्थर, मिट्टी और मलबे के ढेर लग गए हैं। करोड़ों रुपये की लागत से बने इस प्रोजेक्ट की पहली ही बाढ़ में हुई दुर्दशा ने प्रशासन के नियोजन और काम के स्तर पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बाढ़ का पानी उतरे कई दिन बीत चुके हैं; फिर भी मनपा प्रशासन और संबंधित एजेंसियों ने इस क्षेत्र की मरम्मत या सफाई पर कोई ध्यान नहीं दिया है।

घाट पर आने वाले पर्यटकों और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को इस मलबे और कचरे के बीच से ही रास्ता बनाना पड़ रहा है। इसी अव्यवस्था और कचरे के पास एक बेघर व्यक्ति सोया हुआ दिखाई देता है। राजू ठाकरे द्वारा अपने कैमरे में कैद की गई इस तस्वीर में एक ही फ्रेम में विकास कार्यों की घटिया गुणवत्ता, प्रशासनिक लापरवाही और सामाजिक वास्तविकता साफ उजागर होती है।

निद्राधीन व्यवस्था पर उठते सवाल

विकास कार्यों पर करोड़ों रुपये का फंड खर्च किया जाता है, लेकिन काम की गुणवत्ता और समय पर रखरखाव अधिक महत्वपूर्ण होता है। बाढ़ के पहले ही झटके में बदहाल हुए इन कार्यों को देखकर नागरिकों में रोष है कि उनके टैक्स का पैसा पानी में बह गया है। घाट का यह दृश्य देखकर नागरिक तीखा सवाल पूछ रहे हैं कि 'वह गहरी नींद सिर्फ उस बेघर व्यक्ति की है या फिर संबंधित प्रशासनिक तंत्र भी सोया हुआ है?' गोदाघाट की यह दयनीय स्थिति स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाती है। नागरिक यहां तुरंत सफाई और मरम्मत कराने की मांग कर रहे हैं।

कांग्रेस ने दी आंदोलन की चेतावनी

कांग्रेस शहर-जिलाध्यक्ष निलेश खैरे ने कहा कि विकास कार्यों के नाम पर करोड़ों रुपये का फंड कैसे पानी में बहाया जाता है, गोदाघाट की यह हालत इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। काम कितना घटिया था, यह पहली ही बाढ़ में साफ हो गया है। बाढ़ का पानी उतरे कई दिन होने के बावजूद प्रशासन का ध्यान न देना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।

करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी दुर्दशा पर उठा सवाल

यह लापरवाही न केवल घाट की सुंदरता बिगाड़ रही है, बल्कि श्रद्धालुओं की भावनाओं से भी खिलवाड़ कर रही है। इस घटिया निर्माण की तुरंत जांच कर संबंधित ठेकेदार और अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। यदि गोदाघाट की तुरंत सफाई और मरम्मत नहीं की गई, तो कांग्रेस पार्टी की ओर से तीव्र आंदोलन छेड़ा जाएगा।

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