Underpass Project Nashik (सोर्सः सोशल मीडिया) 
नासिक

नासिक: द्वारका सर्कल अंडरपास परियोजना को मिली गति; 213.85 करोड़ की लागत से बदलेगी यातायात की सूरत

Nashik Dwarka Circle: द्वारका सर्कल पर 213 करोड़ के अंडरपास का काम शुरू। नागरिकों की सुविधा के लिए सर्विस रोड और वैकल्पिक मार्ग तैयार किए जा रहे हैं। फरवरी 2027 तक पहला चरण पूरा करने का लक्ष्य।

रूपम सिंह

Underpass Project Nashik News: नासिक शहर के अत्यंत व्यस्त द्वारका सर्कल स्थित अंडरपास परियोजना का काम शुरू होने के बाद स्थानीय नागरिकों और दुकानदारों को काफी असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। इसी पृष्ठभूमि में नागरिकों को वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन ने त्वरित कदम उठाते हुए सर्विस रोड तैयार करने का कार्य शुरू किया है। इस मार्ग के तैयार होने से स्थानीय लोगों की परेशानी कम होने के साथ-साथ दुकानदारों को होने वाला संभावित आर्थिक नुकसान भी टल सकेगा।

10 महीने में काम होगा पूरा

अंडरपास का कार्य लगभग दस महीने तक चलने की संभावना है। इस अवधि में स्थानीय लोगों को नुकसान न हो, इसके लिए महाराष्ट्र राज्य पायाभूत विकास महामंडल ने पहल की है। बुधवार से इस कार्य की औपचारिक शुरुआत होगी और काठे गली से द्वारका क्षेत्र तक का भाग पहले चरण में लिया जाएगा। इस मार्ग पर स्थित चार पेड़ों का पुनरोपण किया जाएगा, जिसके बाद सड़क का चौड़ीकरण कर यहां सर्विस रोड की तर्ज पर कच्चा मार्ग तैयार किया जाएगा।

213 करोड़ 85 लाख रुपये आएगी लागत

मुंबई-आग्रा और पुणे-नाशिक महामार्गों को जोड़ने वाला द्वारका सर्कल शहर का सबसे व्यस्त चौराहा माना जाता है। यहां फ्लाईओवर होने के बावजूद सुबह और शाम के समय भारी ट्रैफिक जाम की समस्या बनी रहती है। आगामी कुंभमेले की पृष्ठभूमि में यातायात को सुगम बनाने के लिए अंडरपास की मांग लंबे समय से की जा रही थी। इसी के तहत सरकार ने 213 करोड़ 85 लाख रुपये की लागत से इस परियोजना को मंजूरी देते हुए कार्य को गति दी है। कार्य की अवधि लंबी होने के कारण यातायात के लिए वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था भी की गई है। काठे गली से कई वैकल्पिक रास्ते उपलब्ध कराए गए हैं।

नागरिकों के लिए वैकल्पिक मार्ग कराए जाएंगे उपलब्ध

साथ ही सारडा सर्कल से भी वैकल्पिक मार्ग शुरू किए गए हैं तथा नई एनडीसीसी बैंक की ओर जाने के लिए अलग मार्ग तैयार किया गया है, जिससे नागरिकों को कुछ हद तक राहत मिली है। यह परियोजना दो चरणों में पूरी की जाएगी और पहले चरण को फरवरी 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि कार्य निर्धारित समय से पहले पूरा हो, इसके लिए अधिकारियों द्वारा विशेष योजना बनाई जा रही है। तकनीकी अड़चनें, यूटिलिटी शिफ्टिंग और यातायात प्रबंधन जैसी चुनौतियां मौजूद होने के बावजूद विभिन्न एजेंसियों के समन्वय से कार्य को गति देने का प्रयास जारी है।

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