Nashik Ganeshotsav: गणेशोत्सव में डीजे और लेजर शो को लेकर अब भाजपा में ही दो अलग-अलग राय सामने आने लगी हैं। नासिक के पालकमंत्री और भाजपा नेता गिरीश महाजन ने न्यायालय द्वारा निर्धारित नियमों का पालन करते हुए डीजे बजाने पर आपत्ति नहीं होने की बात कही है।
वहीं, भाजपा के नासिक महानगर अध्यक्ष सुनील केदार ने इससे भी सख्त रुख अपनाते हुए डीजे और लेजर शो पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की मांग की है। इससे गणेशोत्सव के दौरान ध्वनि प्रदूषण के मुद्दे पर भाजपा में ही मतभेद सामने आए हैं।
गणेशोत्सव नजदीक आते ही डीजे के शोर का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। ध्वनि प्रदूषण से नागरिकों को होने वाली परेशानी, छोटे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव को देखते हुए डीजे के विरोध में आवाज उठने लगी है। पुणे के सामाजिक कार्यकर्ता विद्यानंद बापट द्वारा डीजे के खिलाफ उठाई गई मुखर आवाज से इस मुद्दे को राज्यभर में नई चर्चा मिली है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार ने भी बापट की भूमिका का समर्थन किया है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने डीजे का सीधे तौर पर विरोध करने के बजाय उत्सव और नागरिकों की परेशानी के बीच संतुलन बनाते हुए समाधान निकालने की जरूरत जताई है। इसी पृष्ठभूमि में गिरीश महाजन ने भी डीजे पर सीधे प्रतिबंध की मांग नहीं करते हुए नियमों के दायरे में उत्सव मनाने की भूमिका रखी है।
महाजन ने कहा कि त्योहार और उत्सव का अपना महत्व है, लेकिन नागरिकों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। न्यायालय द्वारा निर्धारित ध्वनि सीमा और अन्य नियमों का पालन करते हुए डीजे बजाने में आपत्ति नहीं है। हालांकि, तेज आवाज से बुजुर्गों, बीमार लोगों और छोटे बच्चों को परेशानी न हो, इसकी जिम्मेदारी गणेश मंडलों को उठानी चाहिए।
दूसरी ओर, सुनील केदार ने डीजे के इस्तेमाल पर ही सवाल उठाते हुए कहा कि नियम होने के बावजूद कुछ अति उत्साही मंडल उनका पालन नहीं करते। अपने मंडल की ओर अधिक लोगों को आकर्षित करने के लिए कानठले आवाज में डीजे और गाने बजाए जाते हैं। इसलिए डीजे और लेजर शो पूरी तरह बंद होने चाहिए, ऐसी स्पष्ट भूमिका केदार ने रखी। उन्होंने कहा कि लेजर शो से आंखों को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। इसलिए ऐसे कार्यक्रमों पर भी रोक लगनी चाहिए।
गणेशोत्सव पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ मनाया जाना चाहिए। ध्वनि सीमा का उल्लंघन करने वाले मंडलों पर पुलिस को मौके पर ही कार्यक्रम बंद कर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, ऐसी मांग भी उन्होंने की। केदार ने यह भी कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वाले मंडलों से नागरिकों को दूरी बनानी चाहिए। ऐसे मंडलों के खिलाफ जनजागरण, विरोध और सामाजिक बहिष्कार के माध्यम से संदेश दिया जाना चाहिए, ताकि उत्सव के नाम पर ध्वनि प्रदूषण फैलाने वालों पर अंकुश लगाया जा सके।