

Sushiben Shah Seeks Urgent Reforms: नासिक जिले के आश्रम स्कूलों में हुई छात्राओं की मौत पर बाल अधिकार आयोग की पूर्व अध्यक्ष एडवोकेट सुशीबेन शाह ने गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यह घटना केवल आक्रोश नहीं, बल्कि ठोस सुधारात्मक कार्रवाई की मांग करती है।
शाह के अनुसार इस मामले की उच्चस्तरीय और समयबद्ध जांच होनी चाहिए, ताकि यह पता चल सके कि क्या इन मौतों को रोका जा सकता था।
पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि जांच का मकसद सिर्फ यह जानना नहीं होना चाहिए कि उस दिन क्या हुआ, बल्कि यह भी देखना जरूरी है कि कहीं चिकित्सा सुविधाओं, कर्मचारियों की उपलब्धता, निगरानी और आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था में ऐसी खामियां तो नहीं हैं, जो अन्य बच्चों की जान को भी खतरे में डाल सकती हैं।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि चिकित्सा सुविधाओं और बाल संरक्षण व्यवस्था को कभी भी द्वितीयक मुद्दा नहीं माना जा सकता, क्योंकि जब कोई बच्चा किसी आवासीय संस्था की देखरेख में रहता है, तो उसकी सुरक्षा और स्वास्थ्य की पूरी जिम्मेदारी संस्था और संबंधित अधिकारियों की होती है।
एडवोकेट शाह ने कहा कि एक चूक के परिणाम कभी अपूरणीय हो सकते हैं और यह घटना हर आश्रम स्कूल तथा बच्चों की देखरेख के लिए जिम्मेदार प्रत्येक प्राधिकरण के लिए एक गंभीर चेतावनी होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवारों को जवाब मिलना जरूरी है, लेकिन इससे भी ज्यादा जरूरी यह है कि यह त्रासदी ठोस सुधारात्मक कदमों का आधार बने, ताकि भविष्य में किसी भी माता-पिता को टाली जा सकने वाली चूक के कारण अपना बच्चा न खोना पड़े।
घटना की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि नासिक जिले के कलवण तालुका स्थित विसापूर के शासकीय आश्रम स्कूल में पढ़ने वाली आठ वर्षीय छात्रा सृष्टि सूर्यवंशी की बुखार-उल्टी के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इसके बाद स्कूल के 24 अन्य विद्यार्थियों को एहतियातन अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।