प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: AI) 
नासिक

विवाह से पहले काउंसलिंग जरूरी, सिकलसेल मुक्त महाराष्ट्र की ओर नासिक का बड़ा कदम

Maharashtra Sickle Cell Free Mission: नासिक में ‘अरुणोदय सिकलसेल एनीमिया विशेष अभियान’ को जबरदस्त प्रतिसाद मिला है। 2 लाख से अधिक लोगों की जांच में 205 वाहक और 7 नए मरीज सामने आए हैं।

आकाश मसने

Arunodaya Sickle Cell Campaign: सिकलसेल मुक्त महाराष्ट्र के लक्ष्य को प्राप्त करने और नासिक जिले में अनुवांशिक दोषों को रोकने के लिए संचालित 'अरुणोदय सिकलसेल एनीमिया विशेष अभियान' को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल रही है। मुख्य कार्यकारी अधिकारी ओमकार पवार के मार्गदर्शन में व्यापक जन-जागरूकता के कारण इस मुहिम को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत अब तक 2 लाख से अधिक नागरिकों की जांच सफलतापूर्वक पूर्ण हो चुकी है।

जमीनी स्तर पर जागरूकता के प्रयास

स्वास्थ्य विभाग इस अभियान की जानकारी समाज के अंतिम छोर तक पहुंचाने के लिए विभिन्न माध्यमों का उपयोग कर रहा है। गांवों में मुनादी, स्कूलों में व्याख्यान, प्रभात फेरियों और वॉल पेंटिंग के जरिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। आशा कार्यकर्ता और स्वास्थ्य कर्मी घर-घर जाकर परामर्श दे रहे हैं, जिससे नागरिकों के मन से बीमारी का डर कम हुआ है।

लक्ष्य और वर्तमान स्थिति

सोशल मीडिया, आकाशवाणी और जिंगल्स के जरिए सिकलसेल की गंभीरता को समझाया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने जिले के 0 से 40 वर्ष आयु वर्ग के सभी नागरिकों की जांच का लक्ष्य निर्धारित किया है। अब तक हुई 2 लाख से अधिक जांचों में 205 नए सिकलसेल वाहक और 7 नए मरीज पाए गए है। जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सुधाकर मौरे ने अपील की है कि जो नागरिक अब तक जांच से वंचित हैं, वे भी इस मुहिम में शामिल होकर सहयोग करें।

अभियान की मुख्य बातें

  • आयु वर्गः 0 से 40 वर्ष के नागरिकों की अनिवार्य जांच।
  • उपलब्धि: 2 लाख से अधिक लोगों का सफल परीक्षण, विशेष
  • पहल: अनुवांशिक संक्रमण रोकने के लिए परामर्श सत्र। प्रसार माध्यम आकाशवाणी, सोशल मीडिया और जमीनी स्तर पर 'डोर टू डोर' कैंपेन।

अनुवांशिक संक्रमण रोकने के लिए 'काउंसलिंग'

चूंकि सिकलसेल एक अनुवांशिक बीमारी है, इसलिए इसे अगली पीढ़ी में जाने से रोकने के लिए विभाग ने विशेष 'विवाह-पूर्व परामर्श' सत्रों का आयोजन किया है। 4 फरवरी से 7 फरवरी के बीच आयोजित इन सत्रों में खोजे गए 205 वाहकों को भविष्य के खतरों और सावधानियों के बारे में विस्तार से मार्गदर्शन दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दो सिकलसेल वाहकों के विवाह से होने वाली संतान इस बीमारी का शिकार न हो।

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