Nashik Municipal Corporation MHADA Scam: म्हाडा नियमों की धज्जियां उड़ाकर गरीबों के लिए आरक्षित घरों को हड़पने का मामला अब और गंभीर हो गया है। इस बड़े घोटाले की जांच के बीच नासिक महानगरपालिका के नगर नियोजन विभाग ने अब भूमि अभिलेख विभाग से जवाब-तलब किया है। विभाग ने पत्र लिखकर पूछा है कि तत्कालीन समय में बिल्डरों के लेआउट और भूखंडों के टुकड़ों को किस आधार पर वैध ठहराया गया था।
क्या है पूरा मामला? नियमों के अनुसार, बड़े भूखंडों का विकास करते समय समावेशी आवास योजना के तहत 20 प्रतिशत घर म्हाडा के लिए आरक्षित रखना अनिवार्य होता है। बिल्डरों ने इस कानून का उल्लंघन करते हुए इन घरों को बाजार में व्यावसायिक दरों पर बेच दिया। इस गड़बड़ी के बाद पुलिस में एफआईआर दर्ज की गई थी।
जांच में पता चला कि बिल्डरों ने पहले भूखंडों के छोटे-छोटे टुकड़े किए, जिसे भूमि अभिलेख विभाग ने मंजूरी दी थी और उसी आधार पर मनपा ने लेआउट स्वीकृत किया था।
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इस मामले में फजीहत होते देख अब दोनों विभागों के बीच जिम्मेदारी का खेल शुरू हो गया है नासिक मनपा ने भूमि अभिलेख विभाग से लिखित में पूछा है कि क्या उनके द्वारा पहले सत्यापित किए गए दस्तावेज नियमों के अनुरूप थे या नहीं? इस घोटाले में भूमि अभिलेख विभाग के उप अधीक्षक और मनपा के सहायक निदेशक पहले ही जेल की हवा खा रहे है। नगर नियोजन विभाग के इस पत्र ने भूमि अभिलेख विभाग की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अब देखना यह है कि विभाग इस गंभीर आरोप का क्या जवाब देता है।