

Kiren Rijiju On Modi Press Conference: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मीडिया रणनीति और उनके इंटरव्यू रिकॉर्ड को लेकर अक्सर सियासी गलियारों में बहस छिड़ी रहती है। अब इस ज्वलंत मुद्दे पर मोदी सरकार के केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने खुलकर बात की है। रिजिजू ने पीएम मोदी के नियमित रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस न करने के फैसले का पुरजोर बचाव करते हुए एक बड़ा और चौंकाने वाला दावा किया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इतिहास में किसी भी प्रधानमंत्री ने मीडिया को उतने इंटरव्यू नहीं दिए होंगे, जितने अकेले पीएम मोदी ने पिछले कुछ वर्षों में दिए हैं। इसके बावजूद उन्हें एक ऐसे व्यक्ति के तौर पर पेश करना जो मीडिया से बातचीत नहीं करता, पूरी तरह गलत और भ्रामक धारणा है।
इंडिया टुडे को दिए एक विशेष इंटरव्यू में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू से पूछा गया कि क्या नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस न करने से पीएम मोदी की मीडिया के साथ सीमित बातचीत की धारणा मजबूत होती है? इस पर रिजिजू ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में पीएम मोदी के कार्यकाल का जिक्र करते हुए गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि उस दौरान नरेंद्र मोदी के खिलाफ एक संगठित मीडिया अभियान (ऑर्गनाइज्ड मीडिया कैंपेन) चलाया गया था।
रिजिजू ने तीखे अंदाज में सवाल किया, "जब उन्हें पता हो कि कोई कैंपेन चलाया जा रहा है, मान लीजिए, अगर यह मेरे खिलाफ होता... तो मैं प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों करता?" इसके बजाय, पीएम मोदी ने पिछले कुछ वर्षों में पत्रकारों के साथ व्यक्तिगत रूप से काफी बातचीत की है और कई इंटरव्यू दिए हैं।
रिजिजू के अनुसार, पीएम मोदी पारंपरिक प्रेस कॉन्फ्रेंस के बजाय जनता और समाज के विभिन्न वर्गों से सीधे संवाद स्थापित करने में विश्वास रखते हैं। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस को महज एक औपचारिकता करार दिया। रिजिजू ने उदाहरण देते हुए बताया कि पीएम मोदी सीधे लोगों से कैसे जुड़ते हैं:
ISRO के वैज्ञानिकों के साथ वे लगातार नियमित बातचीत करते हैं और उनका हौसला बढ़ाते हैं।
हर साल परीक्षा के तनावपूर्ण समय में वे छात्रों के साथ सीधे जुड़ते हैं।
खिलाड़ियों की हौसलाअफजाई: ओलंपिक, कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियाई खेलों जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों पर रवाना होने से पहले वे खिलाड़ियों से बात करते हैं और मेडल जीतकर लौटने पर उनसे व्यक्तिगत रूप से मिलते हैं।
इस इंटरव्यू के दौरान किरेन रिजिजू ने संसद के मानसून सत्र में लगातार हुए हंगामे और कामकाज बाधित होने को लेकर विपक्ष पर भी निशाना साधा। उन्होंने विशेष रूप से कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) को आड़े हाथों लिया। रिजिजू ने आरोप लगाया कि सरकार ने विपक्ष से बातचीत और चर्चा की पूरी कोशिश की थी, लेकिन कांग्रेस और सपा पहले ही यह तय कर चुकी थीं कि वे संसद की कार्यवाही को चलने नहीं देंगी।
जब केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री से पूछा गया कि क्या सरकार संसद का कोई विशेष सत्र बुलाने की तैयारी कर रही है, तो किरेन रिजिजू ने इसका कोई सीधा या स्पष्ट जवाब नहीं दिया। उन्होंने संभलकर जवाब देते हुए केवल इतना कहा कि सरकार उचित समय आने पर ही इस बारे में जानकारी देगी।