MLC Election Nashik: महाराष्ट्र में हाल ही में विधानसभा कोटे से 9 सदस्यों के विधान परिषद पहुंचने के बाद, अब स्थानीय संस्थाओं के माध्यम से खाली हुई 16 सीटों पर चुनावी बिगुल फूंक दिया गया है। इसी क्रम में नासिक की एकलौती सीट को लेकर सत्तारूढ़ महायुति के दो बड़े घटकों भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) में अपनी-अपनी दावेदारी को लेकर खींचतान चरम पर पहुंच गया है। भाजपा जहां अपने पास सर्वाधिक 190 वोटर होने का हवाला देकर इस सीट पर अपना स्वाभाविक हक जता रही है, वहीं शिवसेना इतिहास और सिटिंग सीट का फॉर्मूला आगे कर रही है।
इस विवाद को हवा देते हुए शिवसेना के वरिष्ठ नेता और सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे ने दो टूक शब्दों में कहा है, "महायुति का यह सीधा नियम है कि जिस निर्वाचन क्षेत्र में पहले हमारा विधायक या उम्मीदवार जीतकर आया था, वह सीट हमारी ही रहेगी। चूंकि नासिक में पिछली बार शिवसेना का परचम लहराया था, इसलिए इस सीट पर पहला और अंतिम दावा सिर्फ शिवसेना का ही बनता है।" श्रीकांत शिंदे के इस कड़े रुख के बाद नासिक के स्थानीय राजनैतिक हलकों में चर्चा है कि यदि दोनों दलों के बीच आम सहमति नहीं बनी, तो महायुति के ये दोनों घटक दल यहाँ 'मैत्रीपूर्ण लड़ाई' (Friendly Fight) लड़ने के लिए भी अंदरूनी तौर पर कमर कस चुके हैं।
यदि साल 2018 के पिछले नासिक विधान परिषद चुनाव के इतिहास पर नजर डालें, तो अविभाजित शिवसेना के उम्मीदवार नरेंद्र दराडे ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के शिवाजी सहाणे को एकतरफा मुकाबले में करीब 200 वोटों से पटखनी दी थी। उस समय एक दिलचस्प राजनैतिक समीकरण यह देखने को मिला था कि भाजपा ने परदे के पीछे से शिवसेना के खिलाफ जाकर राकांपा (NCP) उम्मीदवार सहाणे को अपना समर्थन दिया था। हालांकि, अब बदले हुए राजनैतिक परिदृश्य में शिवसेना (शिंदे गुट) दराडे की उसी विरासत को अपने पाले में बनाए रखने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है।
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राजनैतिक विशेषज्ञों के अनुसार, महाराष्ट्र विधान परिषद की कुल क्षमता 78 सदस्यों (MLCs) की है, जिनका चयन विभिन्न लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के तहत किया जाता है। कुल संख्याबल में से:
नासिक की यह जंग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जो भी दल इस स्थानीय निकाय सीट पर विजय प्राप्त करेगा, आगामी जिला परिषद और महानगरपालिका चुनावों में उसका पलड़ा और राजनीतिक दबदबा अपने आप भारी हो जाएगा।