Maharashtra Devsthan Inam Act 2026 Temple Trust Protest: तीर्थस्थली के रूप में प्रसिद्ध नासिक में राज्य सरकार के प्रस्तावित महाराष्ट्र देवस्थान इनाम उन्मूलन प्रारूप अधिनियम, 2026 के खिलाफ आक्रोश की लहर उठ गई है। राज्यभर के मंदिर ट्रस्टी, पुजारी और श्रद्धालु एकजुट हो गए हैं और महाराष्ट्र मंदिर महासंघ ने सरकार के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है। महासंघ ने आरोप लगाया है कि यह कानून हिंदू देवस्थानों के अस्तित्व और उनकी आर्थिक व्यवस्था पर सीधा हमला है। सरकार ने यदि इस मसौदे को तुरंत वापस नहीं लिया, तो पूरे महाराष्ट्र में तीव्र आंदोलन छेड़ा जाएगा, ऐसी चेतावनी शनिवार को आयोजित पत्रकार परिषद में दी गई।
पत्रकार परिषद में महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक सुनील घनवट, नासिक जिला संयोजक किसन गांगुर्डे, त्र्यंबकेश्वर देवस्थान ट्रस्टी मनोज थेते, कालाराम मंदिर ट्रस्टी अक्षय कलंत्री, श्री मुक्तिधाम मंदिर ट्रस्टी जगदीश चव्हाण, भाऊसाहेब गंभीरे, दीपक बैरागी, नंदकिशोर भावसार, सोमनाथ गोटेकर और दीपक पाटोदकर सहित विभिन्न देवस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
महासंघ ने आरोप लगाया कि इस कानून में सबसे विवादास्पद बात यह है कि वक्फ बोर्ड की जमीनों को इससे बाहर रखा गया है। धारा 1 उपधारा 2 के तहत वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को छूट दी गई है, जबकि केवल हिंदू देवस्थानों की जमीनों को निशाना बनाया जा रहा है। महासंघ ने इसे संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन बताया।
किसन गांगुर्डे ने सरकार पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज के समय से राजाओं-महाराजाओं ने मंदिरों की पूजा-अर्चना, अन्नछत्र और धार्मिक परंपराओं को बनाए रखने के लिए इनाम स्वरूप जमीनें दी थी।
'महाराष्ट्र सार्वजनिक ट्रस्ट अधिनियम, 1950' के तहत इन जमीनों का मालिकाना हक संबंधित देवता के नाम पर है, लेकिन प्रस्तावित कानून की धारा 3 और 4 के जरिए इन जमीनों को काश्तकारों या पुजारियों के नाम करने का प्रयास किया जा रहा है। इससे मंदिरों की जमीनों का व्यवसायीकरण होगा और भविष्य में मंदिर आर्थिक रूप से कमजोर हो जाएंगे।
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राजस्व महासंघ ने धारा 18 पर भी तीखा विरोध जताया। इसके अनुसार अधिकारियों के फैसलों के खिलाफ सिविल कोर्ट में अपील नहीं की जा सकेगी। महासंघ का आरोप है कि सरकार श्रद्धालुओं और ट्रस्टियों के संवैधानिक अधिकार छीनकर प्रशासनिक तानाशाही लागू करना चाहती है।
महासंघ ने मसौदे पर आपत्तियां दर्ज कराने के लिए अधिक समय देने की मांग की है। साथ ही गुजरात की तर्ज पर महाराष्ट्र में भी एंटी लैंड ग्रैबिंग एक्ट लागू कर देवस्थान की जमीनों को कानूनी संरक्षण देने की मांग की गई। महासंघ ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने तुरंत कदम नहीं उठाया, तो महाराष्ट्र के कोने-कोने में आंदोलन भड़क उठेगा।