लाडकी बहिन योजना (फोटो सोर्स- AI) 
नासिक

नासिक लाडकी बहिन योजना की जांच में बड़ा खुलासा, e-KYCऔर दस्तावेजों में खामी से डेढ़ लाख महिलाएं अपात्र

Ladki Bahin Yojana Update: नासिक जिले में 'मुख्यमंत्री लाडकी बहिन योजना' के तहत ई-केवाईसी और दस्तावेज सत्यापन के बाद करीब 1.5 लाख महिलाएं अपात्र घोषित की गई हैं। अधूरी जानकारी से रुके आवेदन

रूपम सिंह

Nashik  Ladki Bahin Yojana EKYC Verification: राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री लाडकी बहिन योजना के तहत नासिक जिले में लाभार्थियों की पात्रता जांच के दौरान बड़ा खुलासा हुआ है। प्रशासन द्वारा ई-केवाईसी, दस्तावेज सत्यापन और पात्रता मानकों की गहन जांच के बाद जिले की लगभग डेढ़ लाख महिला आवेदकों को अपात्र घोषित कर दिया गया है। इसके चलते इन महिलाओं को मिलने वाला आर्थिक लाभ फिलहाल रोक दिया गया है।

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, योजना का लाभ केवल उन महिलाओं को दिया जाना है जो सरकार द्वारा निर्धारित सभी शर्तों को पूरा करती हैं। इसी उद्देश्य से हाल के महीनों में बड़े पैमाने पर दस्तावेजों की जांच और ई-केवाईसी प्रक्रिया चलाई गई। जांच के दौरान कई मामलों में पात्रता संबंधी नियमों का उल्लंघन सामने आया, जिसके बाद संबंधित आवेदनों को निरस्त कर दिया गया।

अधिकारियों ने बताया कि अपात्र घोषित की गई महिलाओं में बड़ी संख्या उन परिवारों की है जिनकी वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से अधिक पाई गई। योजना के नियमों के अनुसार इतनी आय वाले परिवारों की महिलाएं इस योजना का लाभ लेने के लिए पात्र नहीं हैं। इसके अलावा कई आवेदनों में आवश्यक दस्तावेजों की कमी भी सामने आई।

दस्तावेजों में गड़बड़ी और आय मानदंड उल्लंघन पर कार्रवाई

जांच के दौरान महाराष्ट्र निवासी प्रमाण पत्र (डोमिसाइल), आधार कार्ड, बैंक पासबुक, आय प्रमाण पत्र और जन्म प्रमाण पत्र जैसे अनिवार्य दस्तावेज अधूरे या अनुपलब्ध पाए गए। ऐसे मामलों में आवेदन स्वाभाविक रूप से निरस्त किए गए। वहीं तकनीकी सत्यापन के दौरान कई महिलाओं के दस्तावेजों में नाम, जन्मतिथि, बैंक विवरण और अन्य जानकारियों में विसंगतियां भी पाई गईं, जिससे उनके आवेदन अपात्र श्रेणी में चले गए।

जानकारी के अनुसार, योजना शुरू होने के बाद नासिक जिले से करीब 14 से 15 लाख महिलाओं के आवेदन प्राप्त हुए थे और प्रारंभिक स्तर पर उन्हें स्वीकार भी किया गया था। हालांकि, विस्तृत ई-केवाईसी और दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद लाभार्थियों की संख्या में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।

प्रशासन का कहना है कि योजना का लाभ केवल वास्तविक और पात्र लाभार्थियों तक पहुंचाने के लिए यह कार्रवाई की गई है। अधिकारियों ने महिलाओं से अपील की है कि जिनके आवेदन दस्तावेजी त्रुटियों या अधूरी जानकारी के कारण प्रभावित हुए हैं, वे संबंधित कार्यालयों से संपर्क कर आवश्यक सुधार करवाएं। प्रशासन का दावा है कि पारदर्शिता बनाए रखने और सरकारी धन के दुरुपयोग को रोकने के लिए सत्यापन अभियान आगे भी जारी रहेगा।

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