जलयुक्त शिवार (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया) 
नासिक

नासिक में आचार संहिता की मार, ‘जलयुक्त शिवार 2.0’ के 10 करोड़ के टेंडर और वर्क ऑर्डर एक महीने के लिए अटके

Jalyukt Shivar projects: नासिक में विधान परिषद चुनाव की आचार संहिता लागू होने से 'जलयुक्त शिवार 2.0' के तहत 10 करोड़ के कार्य लटक गए हैं। नए टेंडर और वर्क ऑर्डर के लिए अब एक महीने का इंतजार करना होगा।

रूपम सिंह

Nashik Zilla Parishad Jalyukt Shivar projects: नासिक जिला परिषद के अंतर्गत 'जलयुक्त शिवार 2.0' योजना के कार्यों पर लगा ग्रहण हटने का नाम नहीं ले रहा है। पहले प्रशासनिक लेत-लतीफी और अब विधान परिषद चुनाव की आदर्श आचार संहिता लागू होने के कारण करीब 10 करोड़ रुपये के नए विकास कार्यों के टेंडर और पुराने कार्यों के 'कार्यारंभआदेश' अगले एक महीने के लिए लटक गए हैं।

इसमें नाला निर्माण, सीमेंट और पत्थरों के बांधों की मरम्मत, समतल खाइयां और धान के खेतों की मरम्मत जैसे कई महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं। मृदा एवं जल संरक्षण विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए जिले को 65 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया था, जिसमें से जिला परिषद के जल संरक्षण विभाग को 15।95 करोड़ रुपये की निधि मिली थी।

11 कार्यों के री-टेंडर की मांग भी अटक गई

उधर, बागलाण के विधायक दिलीप बोरसे ने 11 कार्यों के री-टेंडर की मांग की थी, वह प्रक्रिया भी अब आचार संहिता के फेर में फंस गई है। राज्य के मृदा एवं जल संरक्षण विभाग के अवर सचिव के निर्देश पर जिलाधिकारी ने 'जलयुक्त शिवार 2.0' के तहत 92 नए कार्यों को 10 करोड़ रुपये की प्रशासनिक मंजूरी दी थी।

ये काम मुख्य रूप से येवला, नांदगांव, कलवण, सुरगाणा, बागलाण, चांदवड़, इगतपुरी, दिंडोरी और त्र्यंबकेश्वर तहसीलों के थे। जिलाधिकारी द्वारा 14 मई को मंजूरी दिए जाने के बाद जल संरक्षण विभाग ने ई-टेंडरिंग की प्रक्रिया शुरू ही की थी कि आचार संहिता लागू हो गई।

नासिक शहर में 58 कार्यों को मिली थी प्रशासनिक मंजूरी

इस निधि से नासिक जिला कलेक्टर ने 58 कार्यों को प्रशासनिक मंजूरी दी थी। इन कार्यों की टेंडर प्रक्रिया अक्टूबर में शुरू की गई थी, लेकिन वह पूरी नहीं हो सकी। इसके बाद फरवरी 2026 में दोबारा टेंडर मंगाए गए और अप्रैल में जाकर यह प्रक्रिया पूरी हुई।

ठेकेदारों ने अनुमानित लागत से 17 से 30 प्रतिशत तक कम दर पर टेंडर भरे हैं। नियम के मुताबिक, वर्क ऑर्डर देने से पहले ठेकेदारों से दर विश्लेषण और 10 प्रतिशत से कम दर की अंतर राशि का बैंक ड्राफ्ट जमा करने को कहा गया है। हालांकि, अब तक केवल कुछ ही ठेकेदारों ने इसे जमा किया है, जिसके कारण केवल उन्हीं को वर्क ऑर्डर मिल पाए हैं। बाकी ठेकेदारों की प्रक्रिया चल ही रही थी कि इस बीच चुनाव आचार संहिता लागू हो गई।

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