बाणेर में PMPML और पार्किंग के लिए आरक्षित 1.14 लाख वर्गफुट जमीन पर संकट, हाईकोर्ट ने आरक्षण किया रद्द

Pune Traffic Issues: पुणे के बाणेर में PMPML और पार्किंग के लिए आरक्षित 1.14 लाख वर्ग फुट जमीन का आरक्षण हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है। मनपा प्रशासन समय पर अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी करने में विफल रहा।
High Court cancels reservation of 1.14 lakh sq ft land for PMPML & parking in Baner due to PMC's failure in completing the land acquisition process within the deadline.
PMPML और पार्किंग घोटाला (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
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Pune Municipal Corporation PMPML Parking: बाणेर इलाके में पुणे महानगर परिवहन महामंडल लिमिटेड (पीएमपीएमएल) और सार्वजनिक पार्किंग के लिए आरक्षित करीब 1 लाख 14 हजार वर्ग फुट जमीन अब गंभीर संकट में फंस गई है। पुणे महानगर पालिका की इस महत्वपूर्ण संपत्ति को लेकर प्रशासनिक लापरवाही और भूमि माप विभाग की धीमी कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। तय समयसीमा में अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी नहीं होने के बाद जमीन मालिकों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी, जिसके बाद अदालत ने तकनीकी आधार पर आरक्षण रद्द कर दिया।

यह मामला बाणेर के सर्वे नंबर 105, 106, 110 और 111 की करीब 7115 वर्ग मीटर जमीन से जुड़ा हुआ है। इस जमीन को सार्वजनिक परिवहन सुविधा और पार्किंग व्यवस्था के लिए आरक्षित किया गया था। तेजी से विकसित हो रहे बाणेर इलाके में इस परियोजना को यातायात व्यवस्था सुधारने के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा था।

धारा 127 के नोटिस के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई

जानकारी के अनुसार, जमीन मालिकों ने 23 अक्टूबर 2018 को महाराष्ट्र क्षेत्रीय एवं नगर रचना (एमआरटीपी) कानून की धारा 127 के तहत नोटिस जारी किया था। इस नोटिस के बाद नियमानुसार 24 महीने के भीतर जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी करना आवश्यक था।

हालांकि पुणे मनपा प्रशासन समयसीमा में जरूरी प्रक्रिया पूरी नहीं कर सका। पूर्व विपक्षी नेता उज्ज्वल केसकर, सुहास कुलकर्णी और पूर्व नगरसेवक प्रशांत बधे ने आरोप लगाया है कि संयुक्त भूमि माप की प्रक्रिया में जानबूझकर देरी की गई। उनका कहना है कि संबंधित विभाग के पास 60 हजार रुपये शुल्क जमा कराने के बावजूद भूमि माप विभाग ने समय पर सर्वेक्षण और मापन कार्य पूरा नहीं किया।

प्रशासनिक सुस्ती का मिला जमीन मालिकों को फायदा

नेताओं के अनुसार, संयुक्त मापन और अन्य तकनीकी प्रक्रिया लंबित रहने के कारण अधिग्रहण का अंतिम ‘अवॉर्ड’ समय पर जारी नहीं हो सका। इसी देरी का लाभ उठाते हुए जमीन मालिकों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद तकनीकी आधार पर आरक्षण समाप्त कर दिया।

इस घटनाक्रम के बाद मनपा प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विपक्षी नेताओं ने पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। वहीं स्थानीय नागरिकों में भी नाराजगी है कि सार्वजनिक उपयोग की महत्वपूर्ण जमीन प्रशासनिक ढिलाई के कारण हाथ से निकल गई।

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