Nashik Industrial Crisis ( Source: Social Media ) 
नासिक

ईरान-अमेरिका तनाव का असर: ईंधन संकट से नासिक के 500 उद्योग बंद, 8 हजार कामगारों की रोजी-रोटी पर संकट

Nashik Iran US War Impact: ईरान-अमेरिका युद्ध के असर से नासिक के सातपुर और अंबड औद्योगिक क्षेत्रों में गैस आपूर्ति ठप हो गई है। करीब 500 उद्योग बंद होने से 7-8 हजार कामगारों की रोजी-रोटी संकट में है।

अंकिता पटेल

Nashik Industrial Crisis: वैश्विक स्तर पर जारी ईरान-अमेरिका युद्ध की चिंगारी का असर अब स्थानीय स्तर पर गहराई से दिखने लगा है। इस युद्ध के कारण देश में उत्पन्न भीषण ईंधन और गैस संकट ने नासिक के औद्योगिक चक्र को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है।

सातपुर और अंबड औद्योगिक क्षेत्रों की लगभग 500 से अधिक छोटी-बड़ी कंपनियों को औद्योगिक गैस की आपूर्ति न होने से उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया है। इसका सीधा प्रभाव 7 से 8 हजार कामगारों की रोजी-रोटी पर पड़ा है।

कच्चे माल के बावजूद इंधन के अभाव में बंदी: पिछले कुछ हफ्तों से कंपनियों को आवश्यक औद्योगिक गैस मिलना बंद हो गई है। स्थिति यह है कि गोदामों में कच्चा माल तो उपलब्ध है, लेकिन केवल ईंधन न होने के कारण इकाइयां बंद रखनी पड़ रही हैं।

उद्यमियों के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। बिना काम के कामगारों को कितने दिनों तक वेतन दिया जाए, यह बड़ा सवाल है। उद्यमियों को डर है कि यदि कामगार एक बार अपने मूल गांवों की ओर लौट गए, तो दोबारा कुशल जनशक्ति जुटाना कठिन होगा।

सरकार की नीति और उद्योगों की अनदेखी

ईंधन संकट के इस दौर में केंद्र और राज्य सरकार ने धरेलू उपयोग की प्राथमिकता देने की नीति अपनाई है। आम जनता को असुविधा न हो, इसलिए वाणिज्यिक और औद्योगिक गैस आपूर्ति में भारी कटौती की गई है। हालांकि, इस निर्णय ने औद्योगिक उत्पादन की नींव हिला दी है। गैस एजेंसियों से आधिकारिक आपूर्ति न होने के कारण लघु उद्यमियों ने वैकल्पिक रास्ते तलाशे, लेकिन वहां भी निराशा ही हाथ लगी है।

कोरोना काल के जख्म हुए हरे

नासिक के उद्यमियों को कोरोना काल के वे भीषण अनुभव याद आ रहे है, जब पाबंदियों के कारण लाखो कामगार अपने राज्यों को लौट गए थे। उस समय स्थिति सामान्य होने के बाद भी कई कुशल श्रमिक वापस नहीं लौटे थे। आज फिर वही स्थिति दोहराई जा रही है, जहां मालिक 'कामगार बचाएं या उद्योग' के धर्मसकट में फस गए है।

कई व्यवसाय 'घाटे' में चलाने की नौबत

उत्पादन लागत में वृद्धिः गैस की कमी और बढ़ती कीमतों के कारण वस्तु निर्माण की लागत दोगुनी हो गई है।

कीमतें बढ़ाना असंभवः बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा के चलते निर्मित माल की कीमतें अचानक बढ़ाना संभव नहीं है।

भारी आर्थिक घाटाः बढ़ा हुआ खर्च खुद वहन करने के कारण कई व्यवसाय 'घाटे' में चलाने की नौबत आ गई है।

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