सपकाल ने सिंहस्थ कुंभमेले के खर्च पर सवाल उठाए।
किसानों की कर्जमाफी के लिए फंड इस्तेमाल करने की मांग।
सूखा राहत, चारा शिविर और 200 दिन रोजगार की मांग।
Harshwardhan Sapkal Simhastha Kumbh Mela: राज्य में सूखे जैसी स्थिति से किसान आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। फसल का नुकसान, कर्ज का बोझ और खेती की बढ़ती लागत ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
ऐसे समय में नासिक कुंभमेले के लिए 35 हजार करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्तावित खर्च को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार को घेरा है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने सवाल उठाया कि जब किसान राहत और कर्जमाफी की प्रतीक्षा कर रहे हैं, तब हजारों करोड़ रुपये खर्च करने की प्राथमिकता क्या होनी चाहिए?
उन्होंने मांग की कि अनावश्यक खर्च रोककर यह धन सूखा प्रभावित किसानों की सहायता के लिए उपलब्ध कराया जाए।
छत्रपति संभाजीनगर में सरकार के खिलाफ निकाले गए मोर्चे के बाद आयोजित संयुक्त पत्रकार वार्ता में सपकाल ने कुंभमेले की तैयारियों और राज्य सरकार की आर्थिक प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस कुंभमेले की धार्मिक परंपरा के विरोध में नहीं है।
उनका विरोध आयोजन के नाम पर सरकारी धन के कथित दुरुपयोग और भ्रष्टाचार से है। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था का सम्मान होना चाहिए, लेकिन सार्वजनिक धन के इस्तेमाल में पारदर्शिता और जवाबदेही भी जरूरी है।
सपकाल ने आरोप लगाया कि नासिक सिहंस्थ कुंभमेले के लिए बड़े पैमाने पर आर्थिक अपव्यय किया जा रहा है। उनके अनुसार, केवल सीसीटीवी व्यवस्था पर 300 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि चुनिंदा ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए कथित रूप से फर्जी कार्यादेश जारी किए जा रहे हैं।
उन्होंने इन आरोपों की जांच कराने और परियोजनाओं पर होने वाले खर्च का विवरण सार्वजनिक करने की मांग की। सपकाल ने सड़क खुदाई के कारण अब तक 25 लोगों की मौत होने का दावा भी किया।
उन्होंने सवाल उठाया कि विकास कार्यों के दौरान नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदारी तय करने के क्या कदम उठाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ने प्रस्तावित शक्तिपीठ महामार्ग परियोजना के लिए लगभग 80 हजार करोड़ रुपये के खर्च पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इस राशि का उपयोग किसानों की संपूर्ण कर्जमाफी के लिए किया जाना चाहिए।
सपकाल ने राष्ट्रीयकृत बैंकों, सहकारी ऋण संस्थाओं और सूक्ष्म वित्त संस्थानों से कर्ज लेने वाले किसानों को राहत देने की मांग की। उन्होंने नियमित रूप से कर्ज चुकाने वाले किसानों के लिए प्रोत्साहन अनुदान देने की आवश्यकता भी बताई।
ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अभाव में मजदूरों का पलायन रोकने के लिए सपकाल ने रोजगार गारंटी योजना को प्रभावी बनाने की मांग की। उन्होंने प्रत्येक गांव में सालाना 200 दिन रोजगार उपलब्ध कराने का सुझाव दिया। उनका कहना था कि गांवों में काम मिलने से ग्रामीण परिवारों को आर्थिक सहारा मिलेगा और पलायन पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
सपकाल ने सूखा प्रभावित क्षेत्रों के विद्यार्थियों की शिक्षा शुल्क माफ करने और उन्हें निशुल्क बस यात्रा सुविधा देने की मांग की। उन्होंने पशुओं के लिए तत्काल चारा शिविर शुरू करने पर भी जोर दिया। उनके अनुसार, सूखे का असर केवल किसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, विद्यार्थियों और पशुपालकों पर भी पड़ रहा है।
उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की आलोचना करते हुए सपकाल ने आरोप लगाया कि मंत्री किसानों के खेतों तक पहुंचने के बजाय बैठकों तक सीमित हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि किसानों की कर्जमाफी, रोजगार, शिक्षा और पशुओं के चारे को प्राथमिकता देकर तत्काल राहत के ठोस कदम उठाए जाएं।