

त्र्यंबकेश्वर में साधुग्राम के लिए 688 एकड़ जमीन और करीब 470 प्लॉट की योजना बताई गई है।
जमीन अधिग्रहण और स्थान को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने से अखाड़ों की चिंता बढ़ी है।
योजना में सड़क, बिजली, अस्पताल, शौचालय, स्नानघर और सुरक्षा व्यवस्था जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
Sadhu Gram Land Acquisition: महाराष्ट्र सरकार के द्वारा भारी भरकम बजट एलाट होने के बाद मेला विकास प्राधिकरण ने आगामी सिंहस्थ कुंभ की तैयारी को लेकर कागज पर तो बहुत ही अच्छा बेस्ट प्लान बनाकर वाह - वाही बटोर ली लेकिन वास्तविक धरातल पर अभी कहीं से ऐसा नहीं लग रहा है कि शासन प्रशासन का मास्टर प्लान समय पर पूरा हो जाएगा।
आगामी कुंभ को दिव्य -भव्य और ऐतिहासिक बनाने के लिए प्रशासन के द्वारा त्रंबकेश्वर के साधु ग्राम का जो खाका खींचा गया उसको सुनने और समझने के बाद दशनामी परंपरा के सात अखाड़े और उदासीन परंपरा के तीन अखाड़े ने अपनी तरफ से भी इस बार के कुंभ को लेकर भारी भरकम तैयारी शुरू कर दी।
लेकिन अब जैसे-जैसे कुंभ का समय नजदीक आता जा रहा है वैसे वैसे अखाड़ों की चिंता भी बढ़ती जा रही है और इस चिंता का मुख्य कारण है साधु ग्राम की प्रस्तावित योजना। कई महंतों का कहना है कि जब अभी तक साधु ग्राम के लिए जमीन का ही अधिग्रहण नहीं हो पाया और यह साधु ग्राम कहां बसेगी कहां बनेगा इसकी तस्वीर साफ नहीं हो पा रही है तो इस बात पर कैसे विश्वास कर लिया जाए की समय के पहले मार्च तक साधु ग्राम बनकर तैयार हो जाएगा?
2015 के सिंहस्थ कुंभ मेले में त्र्यंबकेश्वर का साधुग्राम बहुत छोटा (करीब 17 एकड़) था जिसमें लगभग 35 छोटे-छोटे प्लाट काटे गए थे । और एक बड़ा प्लांट शंकराचार्य को दिया गया था जहां पर कथा पंडाल बना हुआ था, लेकिन इस बार 5 लाख से अधिक साधु-संतों और श्रद्धालुओं के आने एवं कुंभ के दौरान त्रंबकेश्वर में अस्थाई निवास करने के अनुमान को देखते हुए इसे बढ़ाकर 688 एकड़ करने का खाका तैयार किया गया है।
इसमें साधुओं और विभिन्न अखाड़ों (विशेषकर 10 दशनामी आखाड़े) के ठहरने के लिए करीब 470 प्लॉट्स बनाए जाएंगे। शासन प्रशासन की इसी दावे को ध्यान में रखकर विभिन्न अखाड़ों से जुड़े महंत महामंडलेश्वरों ने अभी तक अपना ठिकाना ढूंढने की कोशिश नहीं की है।
सूत्रों का दावा है कि इसके पहले सभी संत महंत महामंडलेश्वर किसी ने किसी किराए के मकान को बुक कर लिया करते थे लेकिन इस बार उन्हें लग रहा है कि शासन प्रशासन उन्हें जमीन उपलब्ध कराएगा जिस पर वह अपना भव्य पंडाल बना लेंगे लेकिन ऐसा कुछ अब इसलिए नजर नहीं आ रहा है कि बताया जा रहा है कि सरकार की यह योजना अभी केवल कागज के नक्शे तक ही सीमित है?
यहां पर यह बता दिया जाए कि इसके पहले 2014-15 के कुंभ के दौरान त्रयंबकेश्वर में साधु ग्राम प्रयाग तीर्थ तालाब के बगल मात्र 17 एकड़ में बनाया गया था जहां कुल 25 से 30 प्लांट ही काटे गए थे लेकिन कुंभ के अंतिम शाही स्नान के पहले भारी बारिश और जलभराव की स्थिति के कारण अधिकतर साधु संत महात्मा प्लांट छोड़ दिए थे और भारी और व्यवस्था फैल गई थी।
जिसको देखते हुए प्रशासन ने त्र्यंबकेश्वर मंदिर के पीछे कोलंबिका देवस्थान के पास की ऊंचाई वाली लगभग 250+ एकड़ जमीन को भी साधुग्राम के प्रमुख हिस्से के रूप में शामिल और री-लोकेट किया है ताकि मॉनसून में कीचड़ की समस्या न हो?
लेकिन बताया जाता है कि यहां भी विवाद की स्थिति हुई है कुछ ग्राम वासी और कुछ बड़े बिल्डर इस बात का विरोध कर रहे हैं जिसके कारण सरकार की यह योजना भी अभी एकदम स्पष्ट या यह कहा जाए कि इसकी भी तस्वीर साफ नहीं है?
इस योजना के तहत साधुग्राम में केवल टेंट ही नहीं, बल्कि चौड़ी आंतरिक सड़कें, वाटर एटीएम, बिजली आपूर्ति, अस्थायी अस्पताल (ICU और एम्बुलेंस के साथ), फायर ब्रिगेड स्टेशन, सीसीटीवी-ड्रोन मॉनिटरिंग और हजारों की संख्या में पक्के-अस्थायी शौचालय और स्नानघर बनाए जा रहे है।
यही नहीं बीच में मार्केट और स्वयं सेवी संस्थाओं के लिए भी जगह उपलब्ध कराई जाएगी जिससे यहां पर कैंप लगाने वाले साधु संतों महंतों और महामंडलेश्वरों को मार्केटिंग करने में कोई परेशानी ना हो।