त्र्यंबकेश्वर (सोर्स: सोशल मीडिया) 
नासिक

त्र्यंबकेश्वर का भविष्य: कंक्रीट स्लैब हटाकर गोदावरी नदी को मूल रूप में लाने की एआई तस्वीर ने छेड़ी नई बहस

Trimbakeshwar Future Plan: आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले के मद्देनजर त्र्यंबकेश्वर में गोदावरी नदी से कंक्रीट स्लैब हटाकर उसे मूल स्वरूप में दिखाने वाली एआई तस्वीर ने शहर के भविष्य पर नई बहस छेड़ दी है।

रूपम सिंह

Trimbakeshwar Future Plan: आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले के बैकड्रॉप में अब 'भविष्य के त्र्यंबकेश्वर' की एक नई और आधुनिक परिकल्पना पर चर्चा शुरू हो गई है। त्र्यंबकेश्वर के मुख्य परिसर, यानी लक्ष्मीनारायण चौक से कुशावर्त तीर्थ और लक्ष्मीनारायण चौक से वेद माता गायत्री मंदिर मार्ग पर वर्तमान में नदी के ऊपर सीमेंट का स्लैब (कंक्रीट की छत) डाला गया है, लेकिन सोशल मीडिया और प्रशासनिक हलकों में अब एक ऐसी एआई (AI) निर्मित तस्वीर सामने आई है, जिसमें कंक्रीट के इस स्लैब को हटाकर नदी को उसके मूल और खुले रूप में दिखाया गया है।

इस तस्वीर के बाद अब यह बहस छिड़ गई है कि भविष्य का त्र्यंबकेश्वर कैसा होना चाहिए। स्थानीय बुजुर्गों और जानकारों के मुताबिक, करीब 8 साल पहले त्र्यंबकेश्वर में नदी पर इस तरह के कंक्रीट के स्लैब नहीं थे। उस समय गोदावरी नदी पूरी तरह खुली थी और उसका प्राकृतिक

प्रवाह साफ दिखाई देता था। समय के साथ, भीड़ नियंत्रण और रास्तों के चौड़ीकरण के नाम पर नदी को कंक्रीट के स्लैब से ढंक दिया गया। वर्तमान में त्र्यंबकेश्वर मंदिर, लक्ष्मीनारायण चौक से कुशावर्त तीर्थं जाने वाला मार्ग श्रद्धालुओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण और व्यस्त मार्ग है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार की गई तस्वीरों में कंक्रीट के जंगल को हटाकर नदी को पुनर्जीवित होते दिखाया गया है।

नदी के दोनों किनारों पर सुंदर घाट, बनाए गए हेरिटेज वॉक

भविष्य की इस परिकल्पना में सीमेंट के स्लैब को हटाकर नदी के दोनों किनारों पर सुंदर घाट, पैदल चलने के लिए हेरिटेज वॉक वे और प्रकाश व्यवस्था। पवित्र गोदावरी नदी के मूल प्रवाह को वापस लाकर त्र्यंबकेश्वर को उसका प्राचीन और आध्यात्मिक स्वरूप लौटना।

कुंभमेले के लिए नया दृष्टिकोण

सिंहस्थ कुंभ मेले में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं ओं को कंक्रीट की सड़क सड़कों के बजाय नदी के पावन तटों का अनुभव कराना। इस एआई जनरेटेड स्केच और परिकल्पना ने त्र्यंबकेश्वर के नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। लोग उम्मीद जता रहे हैं कि भविष्य के विकास कार्यों में इस प्राचीन नगरी के प्राकृतिक और धार्मिक वैभव को इसी तरह सहेजा जाएगा।

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