नासिक में किसानों ने विरोध प्रदर्शन (pic credit; social media)
Farmers protest in Nashik: विधानसभा चुनाव में किया गया कर्जमाफी का वादा अब किसानों के गले की हड्डी बन गया है। सरकार की खामोशी और बैंकों की वसूली कार्रवाई ने किसानों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँचा दिया है। नाराज किसानों ने अब विरोध का नया रास्ता अपनाया है। रविवार से नाशिक के गांवों में घरों और खेतों पर काले झंडे लहरने लगे हैं। किसानों का कहना है कि जब तक पूर्ण कर्जमाफी की घोषणा नहीं होती, आंदोलन रुकने वाला नहीं है।
नासिक जिले के निफाड़ तहसील से शुरू हुआ यह आंदोलन तेजी से थेरगांव, शिरसगांव और वडाली जैसे इलाकों में फैल गया। हजारों की संख्या में किसानों ने एकजुट होकर विरोध दर्ज कराया। ओझर में आयोजित एक अधिवेशन में किसानों ने 10 प्रस्ताव पारित किए और साफ कहा कि अगर सरकार पीछे हटती रही तो आंदोलन और उग्र होगा।
अधिवेशन में जयराम मोरे, सोमनाथ झाल्टे, गोरख जाधव और सोमनाथ सहाने समेत बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए। किसान समन्वय समिति के अध्यक्ष भगवान बोराडे और मोतीराम पाटील ने आह्वान किया कि जिले का हर कर्जदार किसान अपने घर और खेत पर काला झंडा फहराए।
नासिक जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक पर इस समय करीब 2300 करोड़ रुपये किसानों का बकाया है। अगस्त में बैंक ने ऋण पुनर्भुगतान योजना लागू की थी, जिसमें 56,700 बकायादारों के नाम शामिल थे। इनमें से 45,000 किसान जून 2022 से पहले का कर्ज लेकर बैठे हैं। बैंक का कहना है कि वह किसानों को राहत देने के लिए प्रयासरत है, लेकिन किसान संगठन इसे एक बोझिल योजना बता रहे हैं।
किसानों का आरोप है कि इस योजना के तहत उन्हें दोगुना भुगतान करना पड़ेगा, जो पहले से संकट से जूझ रहे किसानों के लिए असंभव है। किसानों की मांग है कि उनके सातबारा उतारे को शून्य किया जाए और सरकार चुनावी वादे के अनुसार कर्जमाफी की घोषणा करे।
किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने जल्द ही कोई ठोस फैसला नहीं लिया तो यह आंदोलन राज्यव्यापी रूप ले सकता है। फिलहाल नाशिक जिले के गांवों में लहराते काले झंडे साफ तस्वीर बयां कर रहे हैं कि किसान अब किसी आश्वासन से मानने वाले नहीं हैं।