Former Minister Resignation Ashok Kharat Case: नासिक के 'भोंदू बाबा' अशोक खरात मामले में हर दिन नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के नेता जितेंद्र आव्हाड द्वारा विधानसभा में उठाए गए सवालों के बाद अब एक ऐसे पूर्व मंत्री की चर्चा जोरों पर है, जो खरात के इस कदर प्रभाव में थे कि उनकी पत्नी को खुद बाबा के दरबार में जाकर उसे 'दम' भरना पड़ा था।
माना जा रहा है कि वह खरात को भगवान मानने लगा था और अंधभक्ति में लीं हो गया था इसी वजह से इस कद्दावर नेता की राजनीतिक पारी को बड़ा झटका लगा और अंततः उन्हें अपनी मंत्री की कुर्सी गंवानी पड़ी।
चर्चा है कि नासिक क्षेत्र के एक प्रभावशाली विधायक अशोक खरात के जाल में इस कदर फंस गए थे कि उन्होंने अपने सामाजिक और राजनीतिक कार्यों से पूरी तरह किनारा कर लिया था। जब पानी सिर से ऊपर चला गया, तब विधायक की पत्नी ने कड़ा रुख अपनाया। वे सीधे खरात के दरबार में पहुँचीं और उसे सख्त लहजे में चेतावनी दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, महिला के इस आक्रामक अवतार को देखकर खुद को शक्तिशाली बताने वाला खरात बुरी तरह डर गया था।
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इस घटना के बाद संबंधित विधायक ने खरात से दूरी तो बना ली और बाद में वे मंत्री भी बने। हालांकि, अंधविश्वास के साये और विवादित बयानों के कारण उनका कार्यकाल बेहद छोटा रहा। कानूनी अड़चनों और राजनीतिक विवादों के चलते मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल के दौरान सबसे पहले उन्हीं की 'विकेट' गिरी। जितेंद्र आव्हाड ने इसी ओर इशारा करते हुए सवाल उठाया कि आखिर महाराष्ट्र जैसे प्रगतिशील राज्य में ऐसे तांत्रिकों को राजनीतिक संरक्षण कैसे मिलता है?
जितेंद्र आव्हाड ने केवल व्यक्तिगत संबंधों पर ही नहीं, बल्कि सरकारी तिजोरी के इस्तेमाल पर भी गंभीर आक्षेप लिए हैं। उन्होंने पूछा कि खरात के प्रभाव वाले मिरगाव में भव्य कमान, पानी की टंकी और सड़कों के लिए करोड़ों का सरकारी फंड किस मंत्री के आशीर्वाद से मिला? आव्हाड ने मांग की है कि छत्रपति शिवाजी महाराज और संत तुकाराम के महाराष्ट्र में काले जादू को बढ़ावा देने वाले हर सफेदपोश चेहरे का पर्दाफाश होना चाहिए।