Nagpur Flooding High Court: नागपुर जिले में मूसलाधार बारिश के कारण उत्पन्न संकट पर हाई कोर्ट द्वारा गंभीरता से संज्ञान लिया गया। विशेषतः हाई कोर्ट ने मानसून से पहले ही शहर में जलभराव न हो, इसके लिए मनपा को उपाय करने के निर्देश दिए थे।
इसके बावजूद 28 जुलाई 2026 को हुई भारी बारिश ने मनपा के दावों की पोल खोल दी। इस संबंध में जब मनपा के मुख्य अभियंता से स्पष्टीकरण मांगा गया तो उन्होंने यह अजीबोगरीब जवाब दिया कि अचानक हुई अतिवृष्टि के कारण यदि किसी इलाके में पानी भर जाता है तो उसे मनपा की निष्क्रयता नहीं माना जा सकता।
मंगलवार को इस संदर्भ में हुई सुनवाई के बाद न्यायाधीश उर्मिला जोशी फालके और न्यायाधीश राज वाकोडे ने समस्या के समाधान के लिए एक समिति गठित करने की चेतावनी दी है।
हालांकि न्यायालय ने टिप्पणी करते हुए कहा कि नागरिकों की समस्याओं का समाधान करना मनपा अधिकारियों का काम है, इसके लिए समिति की आवश्यकता क्यों पड़नी चाहिए, आदेश पारित करने के बाद कोर्ट ने कार्यप्रणाली पर नाराजगी भी व्यक्त की।
मनपा ने दायर किए गए अतिरिक्त हलफनामे में शहर के दीर्घकालिक ड्रेनेज मास्टर प्लान की जानकारी दी। इसके अनुसार अमृत 2.0 के तहत पोहरा नदी के दक्षिणी कैचमेंट क्षेत्र में लगभग 537 किमी लंबा सीवर नेटवर्क बिछाया जा रहा है और यह काम जून 2027 तक पूरा हो जाएगा, साथ ही मनपा ने बताया कि जापान इंटरनेशनल को-ऑपरेशन एजेंसी की मदद से नाग और पीली नदी के कैचमेंट क्षेत्र में 527 किमी का सीवर जाल बिछाया जा रहा है।
खामला स्थित सोमलवार स्कूल के सामने होने वाले जलभराव के बारे में जानकारी देते हुए मनपा ने बताया कि ड्रेन का काम पीडब्ल्यूडी को सौंप दिया गया है। बाधा बन रही बीएसएनएल की 3 पाइपलाइनों को हटा दिया गया है और शेष एक सीवर लाइन को लेकर तकनीकी समाधान निकाला जा रहा है। इसके अलावा, मनपा ने स्पष्ट किया कि हाई कोर्ट के गेट नंबर 7 के पास की ड्रेनेज व्यवस्था की सफाई कर दी गई है।
शहर में नए आरसीसी बॉक्स ड्रेन, कलवर्ट और रिटेनिंग वॉल के निर्माण के लिए एक 'विशेष तकनीकी सलाहकार' की नियुक्ति की जा रही है। इसका प्रस्ताव मंजूरी के लिए स्थायी समिति को भेज दिया गया है, साथ ही वर्धा रोड और एयरपोर्ट परिसर में जलभराव की समस्या पर डीपीआर तैयार करने के लिए 'डीआरए कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड' कंपनी का चयन किया गया है।
अंबाझरी तालाब से 80 फीसदी जलकुंभी (जलपर्णी) हटाई गई।
बांध में नए गेट लगाए गए।
नाग नदी के प्रवाह का चौड़ीकरण कर अतिक्रमण हटाए गए।