Kharif Crop Irrigation Crisis: नागपुर जिले में कम बारिश और लंबे सूखे स्पेल के चलते जिले में जल संकट गहरा गया है। महाराष्ट्र राज्य के सूखा प्रबंधन कोड के 'ट्रिगर-1' के तहत जिले के सभी 14 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया गया है।
वहीं जल संसाधन विभाग (डब्ल्यूआरडी) के 28 सितंबर तक के आंकड़ों के अनुसार जिले के 5 प्रमुख जलाशयों में पानी का भंडारण घटकर क्षमता का केवल 61।03% ही रह गया है, जबकि पिछले साल इसी तारीख को ये बांध लगभग 100% भरे हुए थे।
स्पष्ट है एक ओर जहां खेत सूखे हुए हैं वहीं बांध 'प्यासे' रह गए हैं। आने वाले महीनों में यह बड़ा संकट पैदा कर सकता है। राज्य सरकार ने महाराष्ट्र के कुल 358 तहसीलों में से 265 को सूखा प्रभावित घोषित किया है।
नागपुर जिले के प्रभावित तहसीलों में नागपुर ग्रामीण, कामठी, सावनेर, पारशिवनी, मौदा, भिवापुर, कलमेश्वर, काटोल, रामटेक, हिंगना, उमरेड, कुही, नरखेड़ और नागपुर शहर शामिल हैं।
जिले के 5 प्रमुख बांधों की कुल जल धारण क्षमता 1,449.99 मिलियन क्यूबिक मीटर है।जिसमें वर्तमान में केवल 884.97 एमसीएम पानी उपलब्ध है। पेंच प्रणाली का मुख्य आधार और जिले का सबसे बड़ा जलाशय तोतलाडोह प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चिंता बना हुआ है। तोतलाडोह में केवल 55.34% पानी बचा है।
जल संसाधन विभाग के शुरुआती आकलन के अनुसार 3 प्रमुख जलाशयों (तोतलाडोह, नवेगांव खैरी और खिंडसी में मौजूद 763.57 एमसीएम पानी में से 121 एमसीएम पानी वाष्पीकरण के कारण नष्ट हो जाएगा।
2 217 एमसीएम पानी नागपुर और भंडारा जिलों के लिए पेयजल तथा औद्योगिक उपयोग के लिए आरक्षित रहेगा।
शेष 436 एमसीएम पानी ही सिंचाई के लिए बचेगा।
खेती पर असर: अकेले खरीफ सीजन की सिंचाई के लिए 550 एमसीएम पानी की आवश्यकता होती है जिसके मुकाबले केवल 436 एमसीएम पानी उपलब्ध है।
इसके परिणामस्वरूप 114 एमसीएम पानी की कमी का सामना करना पड़ सकता है। इस जल संकट से जिले की लगभग 65,000 हेक्टेयर कृषि भूमि और किसान सीधे तौर पर प्रभावित होंगे।
| बांध का नाम | वर्तमान जल भंडारण (%) | पिछले वर्ष का जल भंडारण (%) | अंतर / गिरावट (%) |
|---|---|---|---|
| तोतलाडोह | 55.34% | 99.92% | -44.58% |
| वडगाव | 60.76% | 100.00% | -39.24% |
| खिंडसी | 76.67% | 100.00% | -23.33% |
| नवेगांव खैरी | 81.22% | 97.50% | -16.28% |
| नाद | 86.33% | 100.00% | -13.67% |
नागपुर जिले में कम बारिश और लंबे सूखे स्पेल के चलते जिले में मानसून के बाद के समय में कदम रख रहे नागपुर जिले के लिए यह जल संकट बेहद संवेदनशील मोड़ पर है।
उपलब्ध सीमित जल भंडार में से पीने के पानी की आपूर्ति, औद्योगिक उपयोग और फसलों की सिंचाई के बीच संतुलन बनाए रखना स्थानीय प्रशासन और सरकार के लिए एक बड़ी परीक्षा होगी।