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सुपर में ‘कैजुअल्टी’ का सालों से इंतजार, ओपीडी, आईपीडी तक ही सीमित, मरीजों की बढ़ रही परेशानी

Super Speciality Hospital: मेडिकल हॉस्पिटल में 24 घंटे सेवा, सुबह-दोपहर ओपीडी, बाद में कैजुअल्टी जांच होती है। ऐसी सेवा सुपर स्पेशलिटी में भी शुरू होने का इंतजार किया जा रहा है।

प्रिया जैस

Nagpur News: 24 घंटे सेवा देने वाले मेडिकल हॉस्पिटल में सुबह से लेकर दोपहर तक ओपीडी रहती है। इसके बाद आने वाले मरीजों की कैजुअल्टी में जांच की जाती है। इसी तरह की सेवा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में भी शुरू की जानी चाहिए ताकि मरीजों को इलाज में आसानी हो सके लेकिन मैनपॉवर की कमी की वजह से सुपर ओपीडी और आईपीडी तक ही सीमित रह गया है।

प्रशासन द्वारा अब तक कैजुअल्टी विभाग तैयार करने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाये गये। सुपर में सुबह 8 से दोपहर 2 बजे तक ओपीडी शुरू रहती है। कुल 7 विभाग कार्यरत हैं। इनमें हृदय रोग, न्यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी, यूरोलॉजी, सीवीटीएस, पैथोलॉजी स्वतंत्र विभाग हैं जबकि एंडोक्रिनोलॉजी, रुमॅटोलॉजी की भी ओपीडी शुरू की गई है। प्रत्येक विभाग की सप्ताह में 2 दिन ओपीडी रहती है। दोपहर में 2 बजे ओपीडी बंद हो जाती है। इसके बाद यदि मेडिकल से कोई मरीज रेफर किया गया तो फिर उसका ओपीडी के दिन इलाज होगा या फिर वार्ड में इलाज होगा।

छुट्टी के दिन, लंबी होती है वेटिंग

शासकीय अवकाश और रविवार के दिन ओपीडी भी बंद रहती है। नियमानुसार सभी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल रेफरल हॉस्पिटल के तौर पर कार्य करते हैं। किसी भी सुपर स्पेशलिटी में कैजुअल्टी नहीं होती। यदि कैजुअल्टी तैयार करना है तो फिर अतिरक्त मैनपॉवर की आवश्यकता है।

साथ ही ज्यादा ऑपरेशन थियेटर और आईसीयू भी जरूरी होते हैं लेकिन इतने वर्षों बाद भी सुपर में तमाम तरह की सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं। सुपर में कैजुअल्टी शुरू करने के लिए तत्कालीन अधिष्ठाता डॉ. अभिमन्यु निसवाडे, डॉ. सजल मित्रा, डॉ. सुधीर गुप्ता ने प्रयास किये थे लेकिन तकनीकी दिक्कतों की वजह से प्रयास सार्थक नहीं हो सके। इसके बाद से प्रयासों पर ब्रेक लग गया।

  • 02 दिन हर विभाग की ओपीडी
  • 07 कुल स्वतंत्र विभाग
  • 02 बजे दोपहर के बाद बंद
  • 1,000 से अधिक मरीजों की हर दिन जांच

फुल रहती है ओपीडी

सभी विभागों की सप्ताह में केवल 2 दिन ओपीडी होने के कारण अधिक भीड़ रहती है। हर दिन करीब 1,000 से अधिक मरीजों की जांच की जाती है। हर विभाग की ओपीडी में मरीजों की संख्या अधिक होने से जांच में गंभीरता भी नहीं होती। दूरदराज से आने वाले मरीज यदि लेट हो जायें तो फिर उन्हें अगले सप्ताह तक इंतजार करना पड़ता है। सुपर स्पेशलिटी डॉक्टरों की निजी अस्पतालों में फीस अधिक होती है। यही वजह है कि निर्धन व जरूरतमंदों के लिए सुपर ही सहारा बना हुआ है।

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