Nagpur Vijayawada Expressway Bharatmala Project: भारत की बुनियादी ढांचा विकास यात्रा में 'नागपुर-विजयवाड़ा एक्सप्रेसवे' एक मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। 577 किलोमीटर लंबा यह फोरलेन का एक्सप्रेसवे केवल 2 शहरों को जोड़ने वाली सड़क नहीं है बल्कि यह देश के मध्य और दक्षिणी राज्यों के बीच एक आर्थिक गलियारा है।
'भारत माला परियोजना' के अंतर्गत निर्मित यह महामार्ग माल वाहन की बाधाओं को दूर कर परिवहन नेटवर्क को एक नई दिशा प्रदान करेगा। यह महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के विभिन्न औद्योगिक और कृषि प्रधान जिलों से होकर गुजरता है जिससे इन राज्यों की आंतरिक अर्थव्यवस्था में तेजी आएगी।
इसकी लागत लगभग 14-15 हजार करोड़ रुपये अनुमानित है। कार्य की प्रगति को लेकर 2 दिन पहले ही केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बैठक ली थी और अधिकारियों को समय सीमा के अंदर इस प्रोजेक्ट को पूरा करने का निर्देश दिया है। इस महामार्ग से 'समुद्र' की दूरी कम होगी और लॉजिस्टिक क्षेत्र को इसका बड़ा लाभहोगा। तेलंगाना की ओर इस प्रोजेक्ट पर काफी तेजी से काम चालू भी है।
परिवहन क्षमता: आधुनिक इंजीनियरिंग के साथ तैयार किए जा रहे इस मार्ग पर वाहनों की गति और सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है जिससे भारी वाहनों के लिए यात्रा सुगम होगी।
आर्थिक और व्यावसायिक प्रभाव: यह एक्सप्रेसवे नागपुर के 'लॉजिस्टिक्स हब' और विजयवाड़ा के 'वाणिज्यिक केंद्र' के बीच एक सीधा संपर्क स्थापित करेगा।
समय और ईंधन की बचत: वर्तमान की तुलना में यात्रा समय में भारी कमी आएगी जिससे ईंधन की खपत घटेगी और परिवहन लागत में गिरावट आएगी। औद्योगिक विकास मार्ग के किनारे नए औद्योगिक क्लस्टर और लॉजिस्टिक पार्क विकसित होने की प्रबल संभावना है जिससे लाखों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। कृषि उत्पादों का त्वरित परिवहन: महाराष्ट्र और तेलंगाना के कृषि क्षेत्रों से तैयार माल और खराब होने वाली वस्तुओं को दक्षिण भारत की मंडियों तक तेजी से पहुंचाया जा सकेगा।
एक्सप्रेसवे का निर्माण कई चरणों में विभाजित किया गया है। प्रारंभिक चरण में उन हिस्सों पर ध्यान केंद्रित किया गया है जहां यातायात का दबाव अधिक है। भूमि अधिग्रहण और पर्यावरणीय मंजूरी जैसी चुनौतियों के बावजूद, परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है।
-नवभारत लाइव के लिए नागपुर से नीरज नंदन की रिपोर्ट