विदर्भ में जल संरक्षण का नागपुर मॉडल असरदार सोर्स- सोशल मीडिया
नागपुर

विदर्भ में रंग ला रहा नागपुर मॉडल! गाद मुक्ति और नाला चौड़ीकरण से संवर रहे जल निकाय, कृषि को मिली नई संजीवनी

Nagpur Water Conservation: विदर्भ के नागपुर और अमरावती संभाग में ‘नागपुर मॉडल’ के तहत जल संरक्षण कार्य तेज हैं। अब तक 85.79 लाख घन मीटर गाद निकाली गई है और नाला चौड़ीकरण का काम भी जारी है।

अंकिता पटेल

Nagpur Model Water Conservation: विदर्भ नागपुर और अमरावती संभाग में जल संरक्षण के लिए 'नागपुर मॉडल' काफी प्रभावी साबित हो रहा है। जलयुक्त शिवार अभियान (2.0) और मृदा व जल संरक्षण की विभिन्न योजनाओं के तहत क्षेत्र में जल निकायों के सुदृढ़ीकरण और गाद निकालने का काम तेजी से जारी है।

गाद मुक्ति और नाला चौड़ीकरण गादमुक्त बांध, गादयुक्त खेत : जल निकायों से 135.74 लाख घन मीटर गाद हटाने के लक्ष्य के मुकाबले अब तक 85.79 लाख घन मीटर गाद निकाली जा चुकी है। नाला गहरा और चौड़ा करना: 129.87 लाख घन मीटर के लक्ष्य में से 53.14 लाख घन मीटर काम पूरा हो चुका है।

जल संरक्षण कार्यों की स्थिति

नागपुर और अमरावती संभाग में कुल 65,173 कार्य स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 54,413 काम पूरे हो चुके हैं और 10,760 कार्य प्रगति पर है।

अमरावती संभाग के 769 गांवों में 25,159 उपाय और नागपुर संभाग के 742 गांवों में 15, 102 कार्यों की योजना बनाई गई है।

953.67 करोड रुपये के कुल बजट में से जुलाई अंत तक 34, 184 काम पूरे कर लिए गए हैं, जिस पर 672.19 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।

13,692 कार्य पूरे

विशेष निधि के तहत 2,070 गांवों में 16,278 कार्यों के लिए 796.98 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था, जिसके तहत 13,692 कार्य पूरे हो चुके है। मालगुजारी (मामा) तालाबों का सुद्द्धीकरण मामले में नागपुर, गोंदिया, भंदारा, चंद्रपुर और गढ़चिरौली जिलों में ऐतिहासिक माजी मालगुजारी' तालाबों को मजबूत करने को प्राथमिकता दी जा रही है।

संभाग के 1,049 मामा तालाबों में से 395 तालाबों का सुदृढीकरण पूर्ण हो चुका है। जिलावार पूर्ण कार्यः गोंदिया (172), चंद्रपुर (103), गढ़चिरौली (60), भंदारा (48), यवतमाल (19) और नागपुर (12)।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0

प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के तहत नागपुर और अमरावती संभाग में 47 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। स्वीकृत 7.557 कार्यों में से 6,123 काम पूरे किए जा चुके हैं, जिन पर 154.15 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इन जल संरक्षण प्रयासों से न केवल सिंचाई सुविधाओं में सुधार हो रहा है, बल्कि भूजल स्तर बढ़ने से क्षेत्र के कृषि उत्पादन में भी वृद्धि दर्ज की जा रही है।

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