4 लाख से अधिक किसान फसल ऋण माफी योजना के लिए अपात्र AI जनरेटेड इमेज
नागपुर

विदर्भ के 4 लाख किसानों को बड़ा झटका! फसल ऋण माफी योजना से हुए अपात्र; जानें क्या है सरकार की नई शर्त

Vidarbha Loan Waiver: विदर्भ में 4 लाख से अधिक किसान फसल ऋण माफी योजना के लिए अपात्र पाए गए हैं। टैक्स भुगतान और 25 हजार रुपये से अधिक मासिक वेतन-पेंशन प्रमुख कारण हैं।

अंकिता पटेल

Vidarbha Farmers Loan Waiver: नागपुर विदर्भ के 4 लाख से अधिक किसान फसल ऋण माफी योजना के लिए अपात्र पाए गए हैं। इसका मुख्य कारण अन्य स्रोतों से होने वाली आय पर कर (टैक्स) चुकाना या 25,000 रुपये प्रति माह से अधिक का वेतन या पेंशन पाना है।

आर्थिक रूप से संपन्न किसानों को इस योजना से दूर रखने के लिए राज्य सरकार ने कुछ कड़े मानदंड तय किए हैं। इसके तहत वर्तमान और पूर्व विधायक, सांसद तथा स्थानीय निकायों के सदस्यों को भी इस योजना के दायरे से बाहर रखा गया है। सूत्रों का कहना है कि इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल जरूरतमंद और पात्र किसानों को ही इसका लाभ मिले।

9.56 लाख किसानों की सूची

विदर्भ क्षेत्र में पहली सूची के पात्र किसानों का 74 प्रतिशत यानी ऐसे 4.11 लाख कर्जदार इस दायरे से बाहर हुए हैं। बैंकों ने विदर्भ के 9.56 लाख से अधिक डिफॉल्टर किसानों की सूची राज्य सरकार को भेजी थी।

इसकी जांच के बाद सरकार ने नामों को अंतिम रूप दिया। राज्य सरकार पहली सूची में शामिल 5.5 लाख कर्जदारों का
कर्ज माफ करेगी। ऋण का एक हिस्सा बैंक भी माफ करेंगे। इसी तरह की छंटनी के बाद एक दूसरी सूची भी जल्द जारी होने की उम्मीद है।

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नागपुर संभाग में 1.22 लाख नाम हटे

नागपुर संभाग (नागपुर, वर्धा, भंडारा, गोंदिया, चंद्रपुर और गड़चिरोली) से बैंकों ने 2.7 लाख किसानों की सूची भेजी थी। इनमें से 1.22 लाख नाम अस्वीकार कर दिए गए हैं। वहीं अमरावती संभाग (अमरावती, अकोला, यवतमाल, बुलढाणा और वाशिम) में 6.8 लाख में से 2.88 लाख नाम अपात्र पाए गए। इस सूची को तैयार करने के लिए राज्य सरकार ने एक फुलप्रूफ तंत्र विकसित किया है।

इसके तहत आयकर विभाग से भी डाटा लिया गया है जिससे बड़ी संख्या में अपात्र लोगों को बाहर करने में मदद मिली। इसके अलावा आधार लिंक्स और 'एग्रीस्टैक' पोर्टल से मिलने वाली जानकारियों का भी उपयोग किया जा रहा है। इन नियमों से यह सुनिश्चित होगा कि केवल उन्हीं लोगों को लाभ मिले जिनकी आजीविका पूरी तरह से खेती पर निर्भर है।

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