सब्जियां, मानसून, नागपुर, रसोई बजट(सोर्स: सोशल मीडिया)  
नागपुर

मानसून की दस्तक से महंगी हुई सब्जियां, बाहरी आवक पर टिका नागपुर; बिगड़ने लगा किचन बजट

Nagpur Vegetable Prices: मानसून की आहट के साथ नागपुर में स्थानीय हरी सब्जियों की आवक घटने लगी है। बाहरी राज्यों पर बढ़ती निर्भरता से सब्जियों के दाम बढ़ रहे हैं और रसोई का बजट प्रभावित हो रहा है।

अंकिता पटेल

Nagpur Markets Vegetable Prices Monsoon Impact: नागपुर मानसून के आगमन की आहट ने गृहिणियों की रसोई का बजट बिगाड़ना शुरू कर दिया है। बारिश के मौसम की शुरुआत के साथ ही नागपुर के बाजारों में स्थानीय हरी सब्जियों की आवक सिमटने लगी है और बाहरी राज्यों से आने वाली सब्जियों ने अपनी कीमतों से आम जनता को डराना शुरू कर दिया है। स्थिति यह है कि कुछ ही दिनों पहले तक कौड़ियों के दाम बिकने वाली लौकी और तुरई जैसी आम सब्जियों के दाम बढ़ गए हैं।

खुदरा एवं थोक सब्जी विक्रेताओं के अनुसार बारिश से पूर्व नागपुर शहर के आसपास 25-30 किलोमीटर के दायरे में आने वाले ग्रामीण इलाकों के किसान इन दिनों अपनी जमीनें खाली कर रहे हैं। अगस्त और सितंबर में आने वाली नई फसल की तैयारी के लिए खेतों को खाली करना उनकी मजबूरी है। इस वजह से करीब एक से डेढ़ महीने तक स्थानीय स्तर पर सब्जियों का उत्पादन पूरी तरह ठप हो जाता है। स्थानीय स्तर पर पैदावार नहीं होने के कारण शहर अब पूरी तरह से बाहरी आवक पर निर्भर हो गया है। बारिश में यही स्थिति बनी रहेगी।

15 से 22 रु. महंगी हुई लौकी

सब्जियों की आवक पर बाहरी निर्भरता का सीधा असर कीमतों पर होता है। जो लौकी आम दिनों में 8 से 10 रुपए प्रति किलो बिकती थी, वह अब 25 से 30 रुपए प्रति किलो तक पहुंच चुकी है। मतलब लौकी कुछ ही दिनों में 15 से 22 रुपए महंगी हुई है। सब्जी विक्रेताओं के अनुसार आने वाले दिनों में अगर बारिश तेज होती है तो यह कीमतें और भी ज्यादा भड़क सकती हैं।

सिंचाई का पुख्ता साधन नहीं होना बड़ा कारण

व्यापारियों के अनुसार इन दिनों छत्तीसगढ़ से टिंडा, लौकी, तुरई, बीन्स फल्ली और करेला जैसी सब्जियां भारी मात्रा में नागपुर पहुंच रही हैं। विदर्भ में सिंचाई की पर्याप्त सुविधाएं न होना किसानों के लिए सबसे बड़ी दिक्कत बनी हुई है।

सब्जी व्यापारियों के अनुसार छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के नाशिक जैसे इलाकों की तुलना में विदर्भ में सिंचाई के पुख्ता साधन नहीं हैं। इसके अलावा बारिश में हरी सब्जियों की खेती के लिए बहुत अधिक देखभाल की जरूरत होती है। यही वजह है कि यहां के किसान सब्जियों के बजाय लाल मिर्च, गेहूं, तुअर और कपास जैसी फसलों को प्राथमिकता देते हैं।

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