बाघ व तेंदुआ (सोर्स: सोशल मीडिया) 
नागपुर

महाराष्ट्र में बाघ-तेंदुए के हमले जारी, 3 साल में 17044 जानें गईं, डरा रहे बाघों की मौत के आंकड़े

Maharashtra Wildlife Attacks: महाराष्ट्र में पिछले 3 वर्षों में बाघ-तेंदुओं और मानव-पशुधन संघर्ष में 17,044 मौतें हुईं। 112 बाघ और 397 तेंदुए भी प्राकृतिक कारणों, दुर्घटनाओं व शिकार से मारे गए।

आकाश मसने

Maharashtra Wildlife Deaths Report: प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय द्वारा दी गई जानकारी से स्पष्ट होता है कि बाघों और तेंदुओं के हमलों में मानव और पशुधन की मृत्यु दर कम हो रही है लेकिन स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है। पिछले 3 वर्षों में बाघों और तेंदुओं के हमलों में मानव और पशुधन सहित कुल 17,044 जानें गई हैं।

वन्यजीवों द्वारा मारे गए मनुष्यों और पशुओं की संख्या चिंता का कारण है। वहीं दूसरी ओर दुर्घटनाओं, प्राकृतिक कारणों और शिकार के कारण बाघों और तेंदुओं की संख्या भी कम हो रही है।

पिछले 3 वर्षों में 112 बाघ और 397 तेंदुओं की मौत हुई है। बाघों और तेंदुओं के हमलों या उनकी मौतों के मोर्चों पर प्रशासन की विफलता इन आंकड़ों से उजागर होती है।

हमले से हर सप्ताह एक मौत

महाराष्ट्र में बाघों और तेंदुओं के हमले में औसतन प्रति सप्ताह एक मौत हो रही है, जबकि 12 लोग घायल हो रहे हैं। यह दर चिंताजनक है। शहरीकरण और बस्तियों के विस्तार के कारण मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष बढ़ रहा है लेकिन इस पर उपाय करना वन विभाग का काम है। हालांकि वन विभाग की ओर से केवल बाघ या तेंदुए के हमले में मारे गए लोगों के परिवारों को मुआवजा देने तक ही उपाय सीमित दिखाई दे रहे हैं। इसके साथ ही, वन्यजीवों की मौत भी वन्यजीव संरक्षण के लिए एक गंभीर समस्या बन रही है।

दुर्घटनाओं में 20 बाघों की मौत

पिछले कुछ दिनों से बाघ सड़कों पर भी आने लगे हैं। इसके अलावा जंगलों से गुजरने वाले रेलवे ट्रैक भी उनके लिए खतरनाक साबित हो रहे हैं। पिछले 3 वर्षों में 20 बाघों की मौत दुर्घटनाओं में हुई है। इन दुर्घटनाओं ने बाघों के गलियारे (कॉरिडोर) पर सवाल खड़े किए हैं। 64 बाघों की प्राकृतिक मौत हुई, जबकि 3 वर्षों में 21 बाघों का शिकार किया गया। जहर और अन्य कारणों से 5 बाघों की मौत हुई।

185 तेंदुओं की प्राकृतिक मृत्यु

प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय ने आरटीआई कार्यकर्ता अभय कोलारकर को सूचना के अधिकार के तहत बताया है कि बुढ़ापे और बीमारियों के कारण 185 तेंदुओं की प्राकृतिक मृत्यु हुई है। 135 तेंदुओं की मौत दुर्घटनाओं के कारण हुई। बाघों की तरह अब तेंदुए भी सड़कों पर आ रहे हैं। इतना ही नहीं, अब वे बस्तियों में भी घुस रहे हैं। 20 तेंदुओं की मौत बिजली के तारों में फंसने या शिकार के कारण हुई है।

बाघ, तेंदुए और हमलों में मानव व पशुओं की मृत्यु

वर्ष बाघों की मृत्यु तेंदुओं की मृत्यु मानव मृत्यु पशुओं की मृत्यु
2023 52 138 102 7,147
2024 26 144 93 7,118
2025 34 115 50 2,534

मानव और पशु मृत्यु में कमी

  • पिछले 3 वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो बाघों और तेंदुओं के हमलों में मानव और पशुओं की मृत्यु में कमी आई है।
  • वर्ष 2023-24 में 102 मानव और 7,147 पशुओं की मौत हुई थी।
  • वर्ष 2024-25 में इसमें मामूली कमी आई जिसमें 93 मानव और 7,118 पशुओं की मौत हुई।
  • वर्ष 2025-26 में 50 मानव और 2,534 पशुओं की मौत हुई।

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